चरखी दादरी। सरकार समय रहते अगर भारतीय कुश्ती संघ के चुनाव संपन्न करवाती तो यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग से भारतीय कुश्ती संघ की सदस्यता रद्द नहीं होती। सदस्यता रद्द होने का असर ये पड़ेगा कि 16 से 22 सितंबर के बीच सर्बिया में होने वाली पुरुष वर्ल्ड कुश्ती चैंपियनशिप में भारतीय पहलवान भारतीय ध्वज के तले नहीं खेल पाएंगे। साथ ही जीत के जो पदक हैं वो भी भारत के खाते में नहीं गिने जाएंगे। कुश्ती जगत से जुड़े दादरी जिले के मौजिज लोगों ने भारतीय कुश्ती संघ की सदस्यता रद्द होने पर प्रतिक्रिया देते हुए ये बात कही। पढि़ए कुश्ती संघ जिला प्रधान और कोच से बातचीत पर आधारित रिपोर्ट...
45 दिन में चुनाव नहीं करवाने चलते रद्द की गई सदस्यता
भारतीय कुश्ती संघ की सदस्यता 45 दिन में चुनाव नहीं करवाने चलते रद्द की गई है। पिछले कुछ माह पहले कुछ महिला पहलवानों ने कुश्ती संघ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद बृजभूषण शरण सिंह को पद से इस्तीफा देना पड़ा था। वहीं 15 जुलाई तक कुश्ती संघ के चुनाव नहीं कराए जाने के बाद अब सदस्यता रद्द कर दी गई है। इस फैसले के बाद भारतीय पहलवान अब 16 से 22 सितंबर के बीच सर्बिया में होने वाली पुरुषों की वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में भारतीय झंडे के तले नहीं खेल पाएंगे। भारतीय पहलवानों को इस ओलिंपिक-क्वालिफाइंग चैंपियनशिप में यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग के बैनर तले ही खेलना होगा।
-इंद्रजीत सांगवान, जिला कुश्ती संघ अध्यक्ष चरखी दादरी।
पहलवानों पर नहीं होगा असर, लेकिन झंडे तले न खेलने का रहेगा मलाल
देश के पहलवानों पर इसका कोई असर नहीं होगा लेकिन भारतीय झंडे तले कुश्ती न खेलने का मलाल भी रहेगा। यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने भारतीय कुश्ती संघ की सदस्यता रद्द करने का प्रमुख कारण भारतीय कुश्ती संघ की लंबे समय से चल रही चुनावी प्रक्रिया है। सरकार तय समय पर संघ के चुनाव नहीं करा पाई है। हालांकि पहलवान तो खेल का प्रदर्शन कर पाएंगे लेकिन राष्ट्रीय ध्वज तले पदक जीतना बड़ी बात होती है। यह सब सरकार की अनदेखी के कारण हुआ है। इतना हंगामा होने के बाद भी तय समय पर चुनाव नहीं करा पाई है।
- ओमवीर सांगवान, सचिव, जिला कुश्ती संघ चरखी दादरी।