चरखी दादरी। नई अनाज मंडी में किसानों को सरसों बेचने से पहले गुणवत्ता जांच के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मार्केट कमेटी कार्यालय स्थित सरकारी लैब की मशीनें पिछले करीब एक साल से खराब पड़ी हैं जिससे किसानों को मजबूरन निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं लैब में संचालक भी नहीं है। ऐसे में लैब में रखी मशीनें केवल शोपीस बनकर रह गई है। इसका सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ रहा है जहां उन्हें हर बार सरसों की जांच के लिए 100 रुपये अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।
लैब रिपोर्ट के आधार पर होती है खरीद
मंडी में सरसों फसल की खरीद लैब से मिलने वाली गुणवत्ता रिपोर्ट के आधार पर की जाती है लेकिन सरकारी लैब के बंद होने से पूरी व्यवस्था निजी हाथों में चली गई है। निजी लैब संचालक प्रति सैंपल करीब 100 रुपये शुल्क ले रहे हैं। ऐसे में इन दिनों रोजाना करीब 400 किसान जांच करवाने पहुंचते हैं जिससे किसानों पर प्रतिदिन हजारों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
मशीनें हो रही जर्जर
मंडी में स्थापित सरकारी लैब में लगी महंगी मशीनें रखरखाव के अभाव में जर्जर होती जा रही हैं। किसानों और आढ़तियों का कहना है कि यदि समय रहते इन मशीनों की मरम्मत करवा दी जाती, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। सरकारी संसाधनों की अनदेखी से जहां एक ओर किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी संपत्ति भी बर्बाद हो रही है। मार्केट कमेटी में बनी लैब में सरसों के अलावा अन्य फसलों की भी जांच होती थी लेकिन फिलहाल मशीनें बंद होने के कारण जांच नहीं हो पा रही है।
मशीनों काे कराया जाए दुरुस्त : प्रधान
आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान मोहन लाल मकड़ानिया ने कहा कि लैब से किसान अपने फसलों की गुणवत्ता जांच करवाकर लाभ उठा रहे थे लेकिन इस बार लैब बंद है। ऐसे में किसानों को निजी लैब में जाकर सरसों में तेल की मात्रा की रिपोर्ट बनवानी पड़ रही है, जो किसान की जेब पर डाका है। इस लैब के संचालन के लिए मार्केट कमेटी सचिव को भी अपील की गई है।
वर्सन :
मंडी में लैब के उपकरण खराब है, इसको दुरुस्त करवाने के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा गया है। दो-तीन दिन के अंदर मैकेनिक आकर लैब के उपकरणों को दुरुस्त कर देंगे। इसके बाद किसान सरकारी लैब का लाभ उठा पाएंगे। - विजय कुमार, सचिव, मार्केट कमेटी, दादरी।