चरखी दादरी। गरीब तबके के लोगों के लिए शुरू की गई आयुष्मान योजना में सेंधमारी का मामला सामने आया है। आयुष्मान योजना में शामिल निजी अस्पताल संचालकों पर फर्जीवाड़ा का आरोप है और इसके चलते आयुष्मान शाखा की ओर से चार अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी किए गए हैं। इन नोटिस के जरिये 41 मरीजों को दिए गए उपचार की जानकारी भी मांगी गई है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस पर खुलकर कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं। हालांकि उन्होंने जारी किए नोटिस की प्रति मिलने की पुष्टि जरूर की है। अहम बात ये है कि ये फर्जीवाड़ा आयुष्मान मुख्यालय शाखा की ओर से पकड़ा गया है। इसमें जो तथ्य सामने आए हैं वो चौंकाने वाले हैं। ऐसे में अब जिन अस्पतालों ने फर्जीवाड़ा किया है, उनकी मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।
आयुष्मान योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग पात्रों के कार्ड बनाता है। इसके बाद वो पांच लाख तक के निशुल्क उपचार का लाभ उठा सकते हैं। निजी और सरकारी अस्पतालों को उपचार में आने वाला खर्च सरकार की ओर से वहन किया जाता है।
दादरी जिले में सरकारी के अलावा कई निजी अस्पताल आयुष्मान योजना में शामिल हैं और इन्हीं अस्पतालों में से चार पर फर्जीवाड़ा करने का आरोप है। अब ये अस्पताल नोटिस मिलने के 5 दिन के अंदर अपना पक्ष रखेंगे। अगर कोई पक्ष नहीं रखता या फिर पक्ष रखकर विभाग को संतुष्ट नहीं कर पाता है तो फिर उसके खिलाफ आगामी विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- एफआईआर दर्ज करने से लेकर पैनल से बाहर करने का प्रावधान
नाम न छापने की शर्त पर एक डिप्टी सीएमओ ने बताया कि अगर अस्पताल संचालक संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते हैं या फिर जवाब देने से किनारा कर जाते हैं तो कार्रवाई तय है। इसके अनुसार इन अस्पतालों को पैनल सूची से बाहर किया जा सकता है जबकि फर्जीवाड़ा करने पर एफआईआर दर्ज भी हो सकती है।
- किसी अस्पताल में 4 तो किसी में फर्जीवाड़ा के 21 मामले
जिले के करीब 20 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के पैनल में शामिल हैं। इनमें से चार अस्पतालों ने 41 मरीजों के उपचार में फर्जीवाड़ा किया है। एक अस्पताल पर 11 मरीजों के उपचार में फर्जीवाड़ा का आरोप है। वहीं, दूसरे अस्पताल में 5, तीसरे में 21 और चौथे में चार मरीजों के उपचार की एवज में फर्जीवाड़ा करने का आरोप है।
- यूं पकड़ में आई चालाकी
कुछ अस्पताल संचालकों ने मरीज को गंभीर हालत के चलते आईसीयू में भर्ती दिखाकर फोटो अपलोड की है जबकि न तो मरीज आईसीयू की ड्रेस पहने हुए है और न ही ऑक्सीजन मास्क मरीज के मुंह पर है।
कुछ अस्पताल संचालकों ने क्लेम के लिए जो उपचार दिखाया है वो मरीज के दस्तावेजों से मेल ही नहीं खा पा रहा है। ऐसे में स्पष्ट है कि जो उपचार मरीज को दिया दिखाया गया है वो सही नहीं है।
कुछ अस्पताल संचालक ने तो कम समय अवधि के अंदर एक मरीज को बार-बार कुछ-कुछ समय के लिए एडमिट दिखाया गया है। मरीज को भर्ती करने का कारण बार-बार एक ही बीमारी दिखाई गई है।
आयुष्मान योजना के कुछ पैकेज सरकार ने केवल सरकारी अस्पतालों के लिए तय कर रखे हैं। कुछ निजी अस्पताल संचालकों ने मरीज के उपचार के नाम पर इस पैकेज के अनुसार राशि क्लेम का आवेदन किया हुआ है।
आईसीयू में मशीन और ऑक्सीजन सिलिंडर न होने के बावजूद मरीज को भर्ती दिखाकर सरकार से आयुष्मान योजना के तहत क्लेम किया गया जबकि दस्तावेजों में कहीं इस चीज का जिक्र नहीं है।
इधर...दो मामले ऐसे भी जिनमें मरीजों के साथ सरकार से क्लेम की गई राशि
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो हाल ही में दो मामले ऐसे भी सामने आए हैं जिनमें पैनल में शामिल अस्पताल ने उपचार की एवज में मरीजों से रुपये ले लिए जबकि आयुष्मान योजना के तहत सरकार से भी राशि ले ली। ऐसे 18,000 और 30,000 के उपचार के दो मामले पकड़ में आए हैं। इन मामलों में अस्पताल संचालकों को मरीजों की राशि वापस करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
- 83 प्रतिशत पात्रों के बन चुके कार्ड, 17,000 करवा चुके उपचार
दादरी जिले में 2,47,599 के कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग 2,45,400 पात्रों के कार्ड बना चुका है। दादरी जिले के 17,000 पात्र लोगों ने योजना के तहत अपना उपचार करवाया है। इनमें से 12,000 लोगों ने निजी अस्पतालों में जबकि 5,000 ने सरकारी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड दिखाकर उपचार करवाया है।
मुख्यालय की ओर से चार अस्पतालों को नोटिस जारी किए गए हैं जिनकी प्रति हमारे पास भी पहुंची है। निर्धारित समय अवधि के बाद उच्चाधिकारियों की ओर से ही आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। -डॉ. अंकुर, डिप्टी सीएमओ एवं नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना।