चरखी दादरी। बेमौसमी बारिश से सब्जी व फूलों की खेती में 50 से 75 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। खराब मौसम की वजह से फूलों की खेती खराब हो रही है। सब्जी की खेती में फूल व फल खराब हो जाते हैं जिससे औसत पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ता है। बारिश में करेला जल्दी खराब हो रहा है। जलभराव होने से घीया व तोरी की बेल भी खराब हो रही हैं। फूल झड़कर गिर जाते हैं।
कृषि वैज्ञानिकों की सलाह है कि सब्जी के खेत में पानी एकत्रित नहीं होने दें। खेत से पानी की निकासी का उचित प्रबंध करें। लंबे समय तक पानी डटे रहने पर सब्जी जल्दी खराब होती है। राज्य के विभिन्न भागों में किसानों ने ककड़ी, घीया, तोरी, भिंडी, टमाटर, हरी मेथी, हरी मिर्च, खरबूजा व तरबूज आदि की फसलों की खेती कर रखी है। इनमें अगेती व पछेती दोनों प्रकार की किस्में शामिल हैं। फूलों की खेती में ज्यादा नुकसान हो रहा है। बारिश की झड़ी में फूल झड़कर नीचे गिर जाते हैं इससे पैदावार कम होती है। किसान को घाटा झेलना पड़ता है। फूलों की खेती में लागत खर्च भी ज्यादा आता है। इसके बीज काफी महंगे होते हैँ।
बारिश में बूंदे लगने पर करेला खराब होता है। करेला की बेलें भी खराब हो जाती है। घीया व तोरी की बेलों में ज्यादा जलभराव होने पर गल जाती हैं जिससे फल आना बंद हो जाता है। इनमें पानी की ज्यादा मात्रा में जरूरत नहीं होती है। कृषि वैज्ञानिकों की किसानों से सलाह है कि खेत में पानी एकत्र न होने दें। पानी निकासी का उचित प्रबंध करना चाहिए ताकि लंबे समय तक जलभराव होने पर फसल नष्ट न होने पाए। वैज्ञानिकों का सुझाव है कि किसान बारिश के पानी का संचयन करें। खाली खेत में गड्ढा बनाकर पानी को एकत्रित किया जा सकता है। इस पानी से जहां भूमिगत वाटर रिचार्ज होगा वहीं मानसून के बाद सिंचाई में भी इसका सदुपयोग किया जा सकेगा। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बेमौसमी बारिश से नुकसान भी ज्यादा होता है। पकाव के समय ज्यादा नुकसान होता है। टमाटर व हरी मिर्च जल्द खराब हो जाते हैं। इस बार मार्च माह में हुई बारिश से रबी की सभी प्रकार की फसलों में खूब नुकसान हुआ है।
बारिश से सब्जी व फूलों की खेती में काफी नुकसान हुआ है। किसान सब्जी के खेत से पानी निकासी का उचित प्रबंध रखे। पानी को लंबे समय खेत में एकत्रित न होने दें इससे काफी हद तक सब्जियों का बचाव हो सकता है।
-डॉ. चंद्रभान श्योराण, कृषि विशेषज्ञ