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सिविल अस्पताल में फुट क्लीनिक सेवा शुरू, बच्चों के टेढ़े पैरों का होगा फ्री उपचार

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Foot clinic service started in civil hospital, children will have free treatment of crooked legs - फोटो : CharkhiDadri
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सिविल अस्पताल में फुट क्लीनिक सेवा मंगलवार से शुरू हो गई है। हालांकि पहले दिन टॉलिप्स के उपचार का कोई केस नहीं आया, लेकिन क्लीनिक में मौजूद टीम ने एक पॉलीडक्टाइली (पैरों में छह ऊंगलिया होना) की ओपीडी देखी। बच्चे के अभिभावक को ऑपरेशन करवाने की सलाह दी गई है। फुट क्लीनिक की सेवा शुरू होने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भी बच्चों के टेढ़े पैरों का फ्री उपचार करवा सकेंगे। दादरी जिले में यह सेवा पहली बार शुरू की गई है।
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टॉलिप्स(पैरों का टेढ़ापन) जन्मजात बीमारी है। इसका उपचार शुरुआती चरण में करवाया जाना बेहद जरूरी है। दादरी जिले में अब तक फुट क्लीनिक की सुविधा नहीं थी। करीब डेढ़ माह पहले इसकी योजना तैयार की गई थी। इसके तहत अब हर मंगलवार को टीम टॉलिप्स की ओपीडी देखेगी। मंगलवार से इसकी शुरुआत कर दी गई है। सीएमओ डॉ. सुदर्शन पंवार ने इस संबंध में गत दिनों ही आदेश जारी किए थे।
डॉ. सोनिया ने बताया कि मंगलवार को फुट मेडिकल क्लीनिक के पहले दिन कोई टॉलिप्स का केस नहीं पहुंचा। टीम ने एक पॉलीडक्टाइली की ओपीडी देखी है। एक्स-रे के बाद बच्चे के अभिभावक को ऑपरेशन करवाने की सलाह दी गई है। उन्होंने बताया कि अगले सप्ताह से टॉलिप्स के पांच से छह केस आने की उम्मीद है। टॉलिप्स से ग्रस्त बच्चों के अभिभावक स्वास्थ्य विभाग से संपर्क कर चुके हैं।
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प्लस्तर विधि और ऑपरेशन से संभव है उपचार
सीएमओ डॉ. सुदर्शन पंवार ने बताया कि टॉलिप्स में बच्चों के पैर अंदर की ओर मुड़ जाते हैं। बीमारी का उपचार दो विधियों से किया जाता है। इनमें एक प्लस्तर विधि है तो दूसरा ऑपरेशन के जरिये। इसके उपचार में तीन से चार माह का समय लग जाता है।
सीयाम मशीन समेत ओटी के उपकरणों की भेजी डिमांड
फुट क्लीनिक में स्वास्थ्य विभाग ने ओपीडी शुरू कर दी है और जल्द ही ऑपरेशन थिएटर का निर्माण करवाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने फुट क्लीनिक के ओटी के लिए सीयाम मशीन समेत अन्य उपकरणों की डिमांड हेड ऑफिस भेज दी है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि डिमांड पूरी होते ही फुट क्लीनिक ओटी भी शुरू कर दिया जाएगा।
जन्म के चार माह के अंदर उपचार जरूरी
डॉक्टर सोनिया ने बताया कि बच्चे को अगर जन्म से टॉलिप्स है, तो उसका तुरंत उपचार करवाना बेहद जरूरी है। अगर तीन से चार माह के अंदर उपचार करवाया जाए तो सौ फीसदी ठीक होने की संभावना रहती है। अगर दो साल की समयावधि निकाल दी जाए तो संभावना 50 प्रतिशत तक ही रह जाती है।
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ये है टॉलिप्स के लक्षण
- बच्चों के पैरे अंदर की तरफ मुड़ते हैं। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ती है।
- बीमारी से ग्रस्त बच्चे के जमीन पर बैठते समय एडी हवा में उठी रहती है।
- बच्चा लंगड़ाकर चलता है और पैर के बाहरी किनारे से चलने लगता है।
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