अपनी तीन बहनों के साथ साढ़े पांच वर्षीय जय।
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चरखी दादरी। कोरोना की दोनों लहरों ने जिले के कई परिवारों को जीवनभर का दर्द दे दिया। इन दोनों लहरों में जिले में 136 संक्रमितों की मौतें हुई हैं और दूसरी लहर ने तो कई परिवारों को झकझोर कर रख दिया। संक्रमण से किसी ने अपने बेटा खो दिया तो किसी मासूम के सिर से पिता का ही साया उठ गया। कुछ बच्चे तो इतने छोटे हैं कि उन्हें आभास तक नहीं है कि उन्होंने क्या खो दिया। जवान बेटे को खोने का दर्द बुजुर्ग पिता की आंखों से छुपाए नहीं छुप रहा है। जिले में कोरोना संक्रमण के चलते बिखरने वाले कुछ परिवारों पर अमर उजाला की रिपोर्ट...
मां और दादी को खोने के बाद जय के सिर से उठा पिता-दादा का साया
झोझू निवासी साढ़े पांच साल के जय ने कोरोना संक्रमण में अपने दादा और पिता को खो दिया। उसकी और तीन बहनों की देखभाल करने वाले वो दो ही बचे थे। जय की दादी और मां की पहली ही मौत हो चुकी थी। अब दादा और पिता की आठ दिन के अंतराल में कोरोना संक्रमण से मौत हो गई।
पिता को संक्रमण से खोने के बाद 14 वर्षीय बच्चे पर आई दादी की जिम्मेदारी
दुधवार निवासी 14 साल के राहुल पर भी कोरोना कहर बनकर टूटा। राहुल के पिता की गत 14 मई को मौत हुई थी। इससे कुछ साल पहले राहुल की मां भी बीमारी से चल बसी थी। राहुल का पिता सैलून चलाता था और उनकी मौत के बाद अब परिवार में राहुल के अलावा 90 साल की दादी है। राहुल ने अपने पिता का सैलून संभाल लिया है।
29 वर्षीय जवान बेटे को खोया, न बचा पाने का जीवनभर रहेगा मलाल
शहर निवासी एक 49 वर्षीय व्यक्ति ने कोरोना से अपना 29 वर्षीय बड़ा बेटा खो दिया। उक्त व्यक्ति के बेटे की संक्रमित होने के चार दिन के अंदर ही मौत हो गई थी। मृतक युवक गुरुग्राम में नौकरी करता था। बेटे को खोने का दर्द पिता की आंखों में साफ झलकता है। उनका कहना है कि बेटे को न बचा पाने का उन्हें जीवनभर दर्द रहेगा।