चरखी दादरी। डीएपी खाद की किल्लत से किसानों को राहत नहीं मिल पा रही है। खाद की किल्लत का स्थायी तौर पर फिलहाल कोई समाधान नजर नहीं आ रहा है। डीएपी का जिले में स्टॉक करने के लिए गोदाम नहीं होने की वजह से भिवानी जिला मुख्यालय से सप्लाई हो रही है। दादरी जिले में खाद के 50 हजार बैग की जरूरत है जबकि अब तक 15 हजार बैग ही बंट पाए हैं।
इस समय रबी की नकदी माने जाने वाली सरसों की बिजाई का कार्य शुरू हो चुका है और ऐसे में किसानों को डीएपी खाद की सख्त जरूरत बनी हुई है। दिनभर इफको केंद्र व जमींदारा सोसायटी के कार्यालयों में किसानों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। इफको की ओर से अब तक करीब छह हजार बैग बांटे जा चुके हैं। इसी प्रकार जमींदारा सोसायटी ने करीब 9 हजार बैग बांटे हैं। करीब 3 हजार बैग निजी बिक्री केंद्रों से भी वितरित किए गए हैं।
बता दें कि एक किसान को आधार कार्ड पर 50 किलोग्राम वजन के तीन बैग दिए जा रहे हैं। डीएपी का एक बैग 1350 रुपये में मिलता है जबकि इसकी मूल कीमत करीब 2800 रुपये तक आंकी जा रही है। सरकार को इस पर 1600 रुपये तक सब्सिडी देनी पड़ रही है। डीएसपी खाद का उत्पादन देश में गुजरात स्थित कांडला व उड़ीसा प्लांट में होता है जो देश में खपत के लिहाज से काफी कम है।
भारत डीएपी खाद रूस, मिश्र व यूरोप के देशों से आयात करता आ रहा है। जानकारों के अनुसार, भारत में करीब 35 प्रतिशत मात्रा में ही डीएपी खाद का उत्पादन हो पाता है शेष खाद विदेशों से आयात करनी पड़ता है जो कि काफी महंगा पड़ती है। इसी वजह से सरकार को इस पर सब्सिडी देनी पड़ती है। अधिकारियों की किसानों को सलाह है कि डीएपी का सीमित मात्रा में प्रयोग करें। जैविक खाद से कुदरती खेती पर ध्यान दें। इस बार डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके खाद भी सरकारी केंद्रों पर मिल रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार एनपीके खाद में नाइट्रोजन व फास्फोरस के अलावा 16 प्रतिशत पोटाशियम भी है जबकि डीएपी खाद में नाइट्रोजन व फास्फोरस दो ही साल्ट यानी रासायनिक तत्व विद्यमान होते हैं। कृषि विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र सिंह सिहाग का कहना है कि किसान डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके खाद का इस्तेमाल करें। यह खाद बढ़िया है।
भिवानी से समय पर नहीं पहुंच पाते वाहन
जिले में इफको का गोदाम नहीं होने से और भी दिक्कत बन रही है। फिलहाल भिवानी स्थित इफको के गोदाम से डीएपी खाद मंगवानी पड़ रही है। कई बार वाहन के समय पर नहीं पहुंचने की वजह से भी दिक्कत बन जाती है। बिक्री केंद्रों पर किसानों की लंबी लाइन लग जाती हैं। इफको केंद्र के अधिकारियों का मानना है कि अगर एक आधार कार्ड पर चार या पांच बैग बांट दिए जाते हैं तो आपस में लोग ब्लैक में बेचना शुरू कर देंगे इस वजह से प्रत्येक किसान को एक बार में तीन बैग दिए जा रहे हैं।
किसान बोले: खाद की कमी दूर कर राहत दे सरकार
- इस समय किसानों को खाद की जरूरत है, लेकिन मुहैया नहीं हो पा रही। यह बिजाई का समय है और किसानों का पूरा दिन खाद के इंतजार में बीत जाता है। खाद की किल्लत जल्द दूर होनी चाहिए।
-रामकुमार, साहूवास
- सुबह खाद के लिए दादरी आते हैं और शाम को खाली हाथ ही लौटते हैं। किसानों की परेशानियों को देखते हुए सरकार को जल्द से जल्द खाद की कमी दूर कर राहत देनी चाहिए।
बलबीर, मकड़ाना
इस समय रबी की फसलों की बिजाई का काम चल रहा है। सरसों में डीएपी खाद की जरूरत होती है। सरकार को पर्याप्त मात्रा में किसानों को डीएपी उपलब्ध करवाना चाहिए। किसानों को डीएपी के लिए दिनभर लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है।
-रामकुमार कादयान, जिला अध्यक्ष, अन्नदाता किसान यूनियन
डीएपी की कमी मुख्य कार्यालय से ही बनी हुई है। यहां से पांच हजार बैग की डिमांड भेज हुई है। यह खाद कब तक पहुंचेगी यह भी पता नहीं है। किसान डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके खाद भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसकी पावर डीएपी के बराबर की है।
- राजेश कुमार, सहायक मैनेजर, जमींदारा सोसायटी
डीएपी खाद के लिए पुरानी अनाज मंडी में दुकान के बाहर लगी किसानों की भीड़।- फोटो : CharkhiDadri