चरखी दादरी। उपायुक्त श्यामलाल पूनिया ने कहा है कि फसल अवशेष प्रबंधन आज के समय की मांग है। इससे न केवल सही तरीके से फसल अवशेष का निस्तारण हो सकेगा, बल्कि किसान अपनी आमदनी में भी बढ़ोतरी कर सकते हैं। इसी सोच के साथ सरकार की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) स्थापित करने व व्यक्तिगत श्रेणी के लिए अनुदान पर कृषि सयंत्र दिए जा रहे हैं। योजना के तहत किसानों को 50 से 80 प्रतिशत तक का अनुदान भी मिलता है।
उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों को खेत में मिलाने व अन्य प्रबंधन के लिए सुपर एसएमएसए, हैपी सीडर, पैडी स्ट्रा चोपर, मास्टर, हाइड्रोलिक रिवर्सिबल, एमबी प्लाव जीरो टील सीड ड्रील, सुपर सीडर स्ट्रा बेलर, हे रेक सहित ट्रैक्टर चालित स्वचालित क्रॉप रीपर व स्वचालित रीपर कम बाइंडर आदि संयंत्र इस योजना में शामिल है। योजना के तहत पंजीकृत किसान समूह, किसान उत्पादक संगठन व पंचायत को कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के लिए 80 प्रतिशत व व्यक्तिगत श्रेणी के किसान को अधिकतम 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।
उप कृषि निदेशक डॉ. बलवंत सहारण ने बताया कि योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान विभागीय पोर्टल डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.एग्रीहरियाणा.जीओवी.इन पर 25 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के बाद किसान 27 अगस्त तक अपने संबंधित दस्तावेज सहायक कृषि अभियंता के कार्यालय में जमा कराए। किसान का मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण होना अनिवार्य है। व्यक्तिगत श्रेणी में ऑनलाइन आवेदन के लिए किसान के नाम हरियाणा राज्य में पंजीकृत ट्रैक्टर की वैध आरसी, बैंक खाता, पैन कार्ड, परिवार पहचान पत्र एवं आधार कार्ड की आवश्यकता होगी। आवेदन करने वाले किसान को खेत में फसल अवशेष नहीं जलाने बारे शपथ पत्र भी देना होगा। इसके अतिरिक्त एक किसान विभिन्न प्रकार के अधिकतम 3 कृषि यंत्रों पर ही अनुदान ले सकता है और जिन किसानों ने पिछले 2 वर्षों में इन कृषि यंत्रों पर अनुदान लिया है वे इस योजना में उस कृषि यंत्र पर आवेदन करने का पात्र नहीं होंगे।
ऑनलाइन आवेदन करने के लिए किसान को 2.5 लाख से कम अनुदान वाले कृषि यंत्र के लिए 2500 रुपये और 2.5 लाख से अधिक अनुदान वाले कृषि यंत्र के लिए 5000 की टोकन राशि ऑनलाइन जमा करवानी होगी।