चरखी दादरी। बारिश और ओलावृष्टि से सरसों और गेहूं की फसलों में काफी नुकसान हुआ है। यही कारण है कि खरीद सीजन शुरू होने के बाद भी केंद्रों पर गेहूं व सरसों की आवक नहीं हो रही। किसान सरसों में नमी सूखने का इंतजार कर रहे हैं जबकि मंडियों में खरीद एजेंसी के कर्मचारी और आढ़तियों को किसानों के मंडी आने का इंतजार है। इस बार हैफेड महज 133 क्विंटल सरसों की ही खरीद कर पाई है।
सरकार ने भले ही 15 मार्च से सभी मंडियों में सरसों को एमएसपी पर खरीदने की घोषणा कर दी हो, लेकिन मौसम में आए परिवर्तन से हुई बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। इसी का नतीजा है कि मंडी में खरीद कार्य शुरू होने के 19 दिन बाद भी सरसों की आवक नहीं है। अगर सरकारी आंकड़ों को देखा जाए तो अब तक केवल 133 क्विंटल सरसों ही ई-पोर्टल के माध्यम से खरीदी गई है। सरसों खरीद के लिए किसानों और आढ़तियों के लिए सबसे बड़ी बाधा 38 प्रतिशत लैब की शर्त बनी हुई है। ई-नेम पोर्टल पर ही कुछ किसानों ने अब तक सरसों बेची है।
बता दे कि इस वर्ष 29,085 किसानों ने मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर सरसों का पंजीकरण करवाया है। बावजूद इसके अब तक ये किसान फसल लेकर मंडी नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि बेमौसमी बारिश ने फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है।
- 1.31 लाख एकड़ जमीन पर हुई सरसों की बिजाई
सरसों की अधिक पैदावार और मुनाफे के लिए जिले में एक लाख 31 हजार 235 एकड़ जमीन पर सरसों की किसानों ने बिजाई की थी, ताकि सरसों की पैदावार से हुए मुनाफे से अपनी जरूरी कार्य निपटा सके। वहीं, सरकार ने सरसों का एमएसपी भी 5450 रुपये निर्धारित किया है।
नमी के चलते किसान सरसों को बेचने के लिए मंडी में नहीं ला रहे हैं। अभी तक हैफेड ने केवल 133 क्विंटल सरसों की ही खरीद की है। जल्दी ही मंडी में सरसों की आवक बढ़ने की उम्मीद है।
-संदीप बैनीवाल, मैनेजर, हैफेड