चरखी दादरी। खरीफ फसलों की बिजाई की सरकारी डेडलाइन 31 जुलाई को पूरी हो गई है। लेकिन बारिश न होने से किसान फसलों की बिजाई नहीं कर पाए। फिलहाल जिले में सूखे की स्थिति बनी हुई है। किसान संगठनों का कहना है कि जिले को सूखाग्रस्त घोषित करना चाहिए ताकि किसान के नुकसान की भरपाई हो सके। जिले में कपास का रकबा मात्र 18 हजार हेक्टेयर क्षेत्र है।
सरकार की ओर से भी किसी भी क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित करने की डेडलाइन 31 जुलाई होती है क्योंकि इस तिथि के बाद बिजाई का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। खरीफ सीजन का समय बीत चुका माना जाता है। जिले में अब तक कुछ गांवों में ही बिजाई के लायक नाम मात्र की बारिश हुई थी उसके बाद किसानों ने बाजरा आदि की बिजाई कर दी। बाजरे की फसल साढ़े तीन माह में पककर तैयार होती है। इसी प्रकार कपास की फसल भी सूखे की चपेट में है। ग्वार की बिजाई इस बार नहीं हुई है। ज्वार एक हजार हेक्टेयर क्षेत्र में है। मूंगफली का रकबा 20 हेक्टेयर क्षेत्र में है। मूंग मात्र 50 हेक्टेयर क्षेत्र में है।
किसान नेता बोले- फसल सूखने के कगार पर
भाकियू प्रधान हरपाल सिंह भांडवा का कहना है कि सरकार को सूखे की स्थिति को देखते हुए मुआवजा राशि देनी चाहिए। उनका कहना है कि कुछ किसानों ने जैसे-तैसे बिजाई तो कर दी अब बारिश नहीं होने पर फसल सूखने के कगार पर है। नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। इस बार किसान पर दोहरी मार पड़ रही है। सरकार जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों की आर्थिक मदद करनी चाहिए। किसान सभा प्रधान रणधीर सिंह कुंगड़ ने भी सरकार से क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित कर मुआवजा देने की मांग की है।
विभाग ने बिजाई के विवरण की रिपोर्ट हेड ऑफिस भेज दी है। बारिश नहीं होने से पहले से बिजित फसलें भी सूख जाएंगी।
-डॉ. जितेंद्र सिहग, खंड कृषि अधिकारी