संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिला स्वास्थ्य विभाग विशेषज्ञों और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। आलम ये है कि ईएमटी (इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन) के 24 और एंबुलेंस चालकों के 37 पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा विभाग के पास फील्ड वर्क के लिए एक भी गाड़ी नहीं है। इन कमियों के चलते विभागीय कामकाज से लेकर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हैं। सीधे तौर पर मरीजों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि विशेषज्ञों और संसाधनों की कमी दूर करने के लिए मुख्यालय डिमांड भेजी जा चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग की बात करें तो इस समय 19 एंबुलेंस हैं। ऐसे में विभाग के पास नियमानुसार 69 चालक होने चाहिए, जबकि इस समय 37 ही चालक हैं। फिलहाल चालकों के 32 पद खाली हैं। इसके अलावा जिले में ईएमटी के 38 पद सृजित हैं जबकि तैनात 14 ही हैं। इस समय ईएमटी के 24 पद खाली हैं। ईएमटी की कमी के चलते कई बार मरीजों को एंबुलेंस में अकेले ह पीजीआई या अन्य जिला अस्पतालों में रेफर किया जाता है। इसकी बानगी तीन दिन पहले भी गर्भवती महिला को रेफर करने के दौरान देखने को मिली थी। दूसरी ओर विभागीय मौजूदा ईएमटी से ही जैसे-तैसे व्यवस्था बनाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन बात नहीं बन पा रही। एंबुलेंस सेवा नोडल अधिकारी डॉ. अंकुर का कहना है कि जल्द ही ईएमटी और चालकों की कमी दूर करवाई जाएगी और इसके लिए वो लगातार प्रयासरत हैं।
इसके अलावा अहम बात ये है कि फील्ड वर्क के लिए विभाग के पास फिलहाल एक भी गाड़ी नहीं है जबकि ब्लड लाने और अन्य कामों के लिए प्रतिदिन विभाग को एक गाड़ी भिवानी या दूसरे जिलों में भेजनी पड़ती है। इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्रों के निरीक्षण समेत अन्य कामों के लिए भी विभाग को गाड़ी की जरूरत पड़ती है। सूत्रों के अनुसार इस समय विभाग को 14 गाड़ियों की जरूरत है, लेकिन बार-बार डिमांड भेजने के बाद भी जिला स्वास्थ्य विभाग को गाड़ियां नहीं मिल पाई हैं। सिविल अस्पताल से लेकर मातृ-शिशु अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर नई गाड़ियों की दरकार है।
हर माह 200 से अधिक मरीज किए जाते हैं रेफर
सिविल अस्पताल से हर माह 200 से अधिक मरीज रोहतक पीजीआई या अन्य संस्थानों में रेफर किए जाते हैं। इनमें गर्भवती महिलाएं, सड़क दुर्घटना के घायल और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त अन्य मरीज शामिल हैं। इन्हें वहां तक पहुंचाने के लिए ईएमटी जरूरी है, क्योंकि रास्ते में अगर किसी मरीज की तबीयत बिगड़ती है तो ईएमटी उसका उपचार करता है।
जानिये...किस स्वास्थ्य केंद्र को चाहिए कितनी गाड़ी स्वास्थ्य केंद्र- गाड़ी चाहिए
सीएचसी-3
सीएमओ ऑफिस-9
एमसीएच-1
सिविल अस्पताल-1
- इन मामलों में पता चली ईएमटी की भूमिका
केस-1: गत 19 जून की रात नेपाल निवासी एक गर्भवती महिला को रात करीब दो बजे रोहतक पीजीआई रेफर किया गया। बिन ईएमटी पीजीआई जा रही एंबुलेंस सांवड़ के समीप खराब हो गई। इसके बाद ईएमटी को लेकर बौंदकलां सीएचसी से दूसरी एंबुलेंस मौके पर पहुंची और कुछ देर बाद ही गर्भवती महिला ने एंबुलेंस में बच्चे को जन्म दे दिया।
केस:2- करीब एक सप्ताह पूर्व समसपुर निवासी एक गर्भवती महिला को लेकर सिविल अस्पताल आ रही एंबुलेंस में ही डिलीवरी हो गई। गनीमत रही कि उस दौरान ईएमटी और आशा वर्कर एंबुलेंस में थी। आशा वर्कर के सहयोग से ईएमटी ने एंबुलेंस में ही महिला की सफल डिलीवरी करवा दी। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहे और उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई।
वर्जन:: ईएमटी और चालकों की कमी है, लेकिन फिर भी मौजूदा संसाधनों से हम हरसंभव व्यवस्था बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इनकी तैनाती के लिए मुख्यालय डिमांड भेजी जा चुकी है और जद ही यह मांग पूरी होने की उम्मीद है।
-डॉ. अंकुर, नोडल अधिकारी, एंबुलेंस सेवा