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जून में हुई बारिश के दौरान ट्रांसफार्मर समेत जमीन पर गिरा बिजली का खंभा । संवाद
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बिजली का खंभा बदलने का कार्य करते कर्मचारी। संवाद
- बिजली निगम को 1400 खंभे व 2.94 लाख मीटर लंबे तार टूटने पर झेलना पड़ा नुकसान, 1100 नए खंभे लगाने का काम हुआ पूरा
- मई व जून में आंधी व बारिश की वजह से टूट गए थे खंभे, अब भी पटरी पर नहीं आई बिजली व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। मई और जून में आंधी के साथ आई बारिश से बिजली निगम के 1400 खंभे और 2 लाख 94 हजार मीटर लंबे तार टूट गए। इससे बिजली निगम को करीब डेढ़ करोड़ का फटका लगा। जुलाई के पहले सप्ताह तक भी बिजली आपूर्ति व्यवस्था पटरी पर नहीं लौटी है।
करीब तीन लाख मीटर लंबे तार लगाने के लिए निगम को अतिरिक्त पांच प्रतिशत लेबर नुकसान उठाना पड़ा है। निगम ने अब तक 1100 नए खंभे लगा दिए हैं। जल्द ही यह काम पूरा होने जा रहा है। खंभे टूटने की वजह से बिजली की आपूर्ति में कई दिनों तक व्यवधान बना रहा। दूसरे फीडरों से आपूर्ति कर काम चलाना पड़ा है।
दादरी जिले में एक लाख 70 हजार बिजली उपभोक्ता हैं। इस बार मई के अंतिम सप्ताह में कई बार आंधी के साथ बारिश हुई। इससे सबसे ज्यादा बिजली निगम को नुकसान हुआ। एक बार खंभा टूटने पर आपूर्ति बहाल करने में कई दिन लग गए।
इसी प्रकार, जून प्रथम सप्ताह में भी दो से तीन बार आंधी के साथ बारिश हुई। इससे जिले के सभी डिविजन में खंभे टूटे हैं। तारों को भी नुकसान हुआ। जिले में 11 हजार 190 बिजली ट्रांसफार्मर लगे हुए हैं, जिनके जरिये आपूर्ति की जाती है।
- 8000 रुपये है एक बिजली खंभे की कीमत
इस समय बिजली निगम ने जिलेभर में गिरे 1400 में से 1100 खंभे लगा दिए हैं। शेष पर काम जारी है। आने वाले एक सप्ताह में इनका काम पूरा हो जाएगा। निगम को टूटे खंभे नए लगाने पड़े हैं। एक खंभे की कीमत 8000 रुपये है। अब पिछले 10 दिनों से बिजली आपूर्ति पटरी पर लौट सकी है। खासकर बाढड़ा क्षेत्र में आंधी की वजह से खंभे ज्यादा संख्या में टूटे हैं। यह रेतीला क्षेत्र है। खंभा जल्द गिर जाता है।
- जिले में हैं छह सब डिविजन
जिले में बिजली व्यवस्था में पिछले पांच सालों में काफी हद तक सुधार आया है। पावर सब स्टेशनों की संख्या भी बढ़ी है। नए ट्रांसफार्मरों की संख्या भी बढ़ाई गई है। पुराने पावर सब स्टेशनों की क्षमता भी बढ़ाई गई है। उपभोक्ताओं के लिए ऑनलाइन बिल जमा करवाने की प्रक्रिया शुरू करने से सुगमता आई है। जिले में बाढड़ा, दादरी, अटेला, झोझूकलां, सांजरवास सहित छह डिविजन आते हैं। जिले में करीब 4000 बिजली चालित नलकूपों का भी लोड है।
- पेयजल और बिजली शेड्यूल नहीं खा रहा मेल
फिलहाल, बिजली और पेयजल आपूर्ति का शेड्यूल मेल नहीं खा रहा है। इससे शहर में पांच हजार से
अधिक घरों में पेयजल संकट बना हुआ है। जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से जब शेड्यूल के समय पेयजल आपूर्ति न आने की बात कही जाती है तो वे बिजली कट होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेते हैं। पानी भरने के लिए शहरवासियों को रातभर जागना पड़ रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग कोई पुख्ता कदम नहीं उठा रहा है।
वर्सन
नए खंभे लगाने का काम अंतिम चरण में है। अब तक एक हजार खंभे लगा दिए गए हैं। उपभोक्ताओं को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। आपूर्ति सुचारु रूप से की जा रही है।
-अविनाश यादव, एक्सईएन, बिजली निगम