चरखी दादरी। 10 लोकल रूटों पर परिवहन विभाग ने ई-टिकट सेवा शुरू कर दी है। करीब एक सप्ताह पहले शुरू की गई नई व्यवस्था का लाभ सीधे तौर पर विभाग को मिलेगा। इससे जहां परिचालक धांधली नहीं कर पाएंगे तो वहीं विभाग को हर स्टैंड का डाटा भी मिल जाएगा। फिलहाल 50 मशीनों के सहारे यह सेवा शुरू की गई है और जल्द ही अन्य रूटों पर ई-टिकट सेवा के विस्तार के लिए डिपो में 200 मशीनें और पहुंचेंगी।
ई-टिकट सेवा शुरू होने से अब टिकट वितरण में पारदर्शिता के साथ-विभाग के पास प्रत्येक रूट का डिजिटल आंकड़ा भी उपलब्ध हो रहा है। इस आंकड़े के माध्यम से राज्य परिवहन विभाग को टिकटों की संख्या के आधार पर रूटों पर अतिरिक्त बस संचालन में भी मदद मिलेगी। बता दें कि चरखी दादरी डिपो ने गत शुक्रवार से यह योजना शुरू की है। इस समय डिपो के पास 50 मशीनें उपलब्ध हैं जो प्रथम चरण में लोकल रूटों पर दी गई हैं। डिपो के बेड़े में 108 बसें हैं और जल्द ही सभी बसों में ई-टिकट सेवा शुरू करने की योजना है।
अहम बात ये है कि मशीन के माध्यम से प्रत्येक स्टैंड पर बैठने वाली सवारियों का डाटा उपलब्ध होगा। इस डाटा के आधार पर जिन रूटों पर अतिरिक्त बसों की आवश्यकता होगी उसका पता चलेगा और विभाग को वहां बसों के संचालन व फेरे बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। स्टीक डाटा मिलने से ज्यादा यात्रियों वाले रूट पर बसों की संख्या को आसानी से बढ़ाया जा सकेगा। कार्ड आधारित भुगतान मॉडल से परिचालकों द्वारा टिकट वितरण में की जाने वाली धांधली पर भी अंकुश लगेगा जिससे परिवहन के राजस्व में भी वृद्धि होगी। वहीं, चलती बसों में टिकट पंचिंग में परिचालकों को होने वाली गलत पंचिंग से भी छुटकारा मिलेगा।
- बस स्टैंड परिसर के अलावा प्रत्येक बस में होगी मशीन
ई-टिकट मशीनों से निकली टिकट पर यात्री कहां से बैठा और उसे कहां उतरना है, यह सब अंकित होगा। इसके अलावा ई-टिकट कटवाने का समय और तिथि भी टिकट पर अंकित होगी जिससे चेकिंग स्टाफ को भी फायदा मिलेगा। ऐसे में परिचालक टिकटों में हेरा-फेरी नहीं कर सकेंगे जिससे रोडवेज को होने वाले घाटे को कुछ कम किया जा सकेगा। दूसरी ओर हर रोज डिपो में परिचालक के खिलाफ आने वाली शिकायतें भी खत्म हो जाएगी।
डिपो में प्रथम चरण में महेंद्रगढ़, भिवानी, झज्जर, लोहारू, रोहतक, कनीना सहित अन्य लोकल रूटों पर ई-टिकटिंग शुरू कर दी गई है। इसके बेहतर परिणाम भी सामने आ रहे हैं। डिजिटल डाटा उपलब्ध होने से विभाग को काफी मदद मिल रही है। एक सप्ताह में डिपो को 200 मशीनें और मिलने की संभावना है। इसके बाद लंबे रूटों पर भी शुरू कर दी जाएगी। साथ ही इससे मिलने वाला डाटा रूटों पर बसों के संचालन में भी मददगार साबित होगा।
-प्रदीप अहलावत, महाप्रबंधक, चरखी दादरी डिपो