कोरोना के कारण इस बार शहर की 55 साल पुरानी रावण दहन की परंपरा टूटी है। शहर में कहीं भी रावण दहन नहीं किया गया। वहीं, दशहरा पर्व बाजार के लिहाज से भी फीका ही रहा। दशहरा रविवार को होने के चलते 50 फीसदी बाजार बंद रहा और मुख्य सड़कों पर लोगों की चहल-पहल भी कम रही। नगर व्यापार मंडल पदाधिकारियों के अनुसार रविवार को दशहरा के बावजूद कोरोबार दो करोड़ पर सीमित रह गया। व्यापारियों को इससे ढाई गुना कारोबार की उम्मीद थी।
दादरी शहर में श्रीरामलीला कमेटी हर साल रावण दहन करती है। पिछले 55 सालों से लगातार शहर में रावण दहन हो रहा है। इस बार प्रशासन से अनुमति न मिलने के कारण रामलीला मंचन भी नहीं किया जा सका। वहीं, श्रीराम लीला कमेटी ने इस बार रावण दहन न करने का निर्णय भी लिया है।
इन साढ़े पांच दशकों में रावण दहन की सात जगह बदली जा चुकी हैं। श्रीरामलीला कमेटी के पदाधिकारियों के अनुसार पहले रावण दहन रामलीला ग्राउंड में किया जाता था। इसके बाद कीकरवासनी क्षेत्र में, फिर महेंद्रगढ़ चुंगी स्थित खाली ग्राउंड में, फिर शहीद दलबीर सिंह राजकीय स्कूल प्रांगण में और पिछले साल से नगर परिषद कार्यालय के पिछली तरफ खाली पड़ी जमीन पर रावण दहन किया जा रहा है। इस साल रामलीला कमेटी ने रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले तैयार नहीं करवाए। हर साल 71 हजार रुपये से तीन पुतले तैयार करवाए जाते हैं।
2011 में हुआ है जिले के सबसे ऊंचे रावण का दहन
रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों के अनुसार जिले में अमूमन 41 और 31 फीट ऊंचे पुतलों का दहन किया जाता है। महेंदगढ़ के कारीगरों से हर बार पुतले तैयार करवाए जाते हैं। अब तक जिले में सबसे ऊंचे 51 फीट रावण के पुतले का दहन किया गया गया। कमेटी पदाधिकारियों ने बताया कि 2011 में 51 फीट के पुतले का दहन किया गया था।
पिछले साल पांच करोड़ का हुआ था कारोबार
नगर व्यापार मंडल के कार्यकारी प्रधान रविंद्र सिंह गुप्ता ने बताया कि रविवार को दशहरा होने की वजह से 50 फीसदी दुकानें बंद रहीं। ग्राहकों की संख्या भी बेहद कम रही। पिछले साल पांच करोड़ का कारोबार हुआ था, लेकिन इस बार दो करोड़ तक कोरोबार सिमटकर रह गया।
कपड़ा, मिठाई और स्वर्णकार मार्केट में रही काफी मंदी
स्वर्णकार, मिठाई और कपड़ा मार्केट में रविवार को ग्राहकों की संख्या बेहद कम रही। शहर में स्वर्णकार की 80, कपड़े की 120 और मिठाई की करीब 50 दुकानें हैं। इन तीनों मार्केट का कारोबार एक करोड़ का आंकड़ा भी नहीं छू पाया।
आतिशबाजी से बढ़ा प्रदूषण का स्तर
दशहरा से एक रात पहले आतिशबाजी भी शुरू हो गई है। हालांकि इस बार पिछले साल की तुलना में दस प्रतिशत ही आतिशबाजी होने का अनुमान है। इसके बाद जिले में प्रदूषण का स्तर लगातार 325 से पार चल रहा है। आतिशबाजी से आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ने का अनुमान है।