संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। बढ़ते तापमान के बीच जहां शहरी क्षेत्र में कुछ दिनों से पेयजल संकट गहराया हुआ है। ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए हाहाकार मचा हुआ है। शहर की चकाचौंध से दूर गांव झिंझर और मिसरी में पीने के पानी की समस्या गंभीर बनी हुई है। आलम यह है कि गांव मिसरी में पिछले 10 साल से और गांव झिंझर में बीते 6 साल से लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। समस्या को लेकर ग्रामीण कई बार जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को समाधान की गुहार लगा चुके है लेकिन इन गांवों की प्यास नहीं बुझ सकी।
शहर में पिछले छह दिनों से दो तिहाई आबादी में नई पेयजल लाइन का कनेक्शन करने के नाम पर पेयजल आपूर्ति ठप पड़ी है जिसके चलते लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि जनस्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उन्होंने शहर की घिकाड़ा रोड और काठ मंडी क्षेत्र को छोड़ सभी कॉलोनियों में पेयजल आपूर्ति बहाल कर दी गई है। जिले के गांव मिसरी में पिछले 10 सालों से जलघर का खारा व दूषित पानी सप्लाई होने से टैंकरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
गांव झिंझर में 6 साल से पेयजल का गंभीर संकट बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जलघर के टैंक सूखे पड़े है जिसके कारण लोग महंगे दामों में पानी के टैंकर मंगवाने को मजबूर हो रहे है।
ग्रामीणों का कहना है कि दोनों ही गांवों में पेयजल आपूर्ति ठप होने के कारण सबसे ज्यादा मार ग्रामीण महिलाओं पर पड़ रही है। उन्होंने बताया कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए कई बार जनस्वास्थ्य विभाग को पेयजल सप्लाई में सुधार लाने की मांग की गई है। लेकिन अभी तक काम केवल कागजों में ही अटका है।
चंपापुरी में बने है 43 करोड़ लीटर पानी भंडारण के टैंक : जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि शहर के मुख्य जलघर में तीन रिजर्व वाटर टैंक बनवाए गए है। तीनों वाटर टैंक की भंडारण क्षमता लगभग 43 करोड़ लीटर बताई गई है। उन्होंने बताया कि शहर में प्रतिदिन 7 एमएलडी पानी की सप्लाई की जा रही है लेकिन पिछले दिनों पेयजल आपूर्ति सुधार के लिए बिछाई गई लाइनों का कनेक्शन करने के लिए सप्लाई बंद की गई थी। कुछ कॉलोनियों में कनेक्शन करने के बाद सप्लाई शुरू कर दी है।