चरखी दादरी। शहर में मानसून सीजन में सीवर और पेयजल लाइनों की लीकेज बढ़ गई है। आलम ये है कि जिस क्षेत्र में लाइन लीकेज की शिकायत मिलती है वहां विभाग हर 100 मीटर की दूरी पर गड्ढे खोदकर लाइन चेक करनी पड़ रही है। इससे विभागीय टीमों का काम चुनौतीपूर्ण हो रहा है तो वहीं सड़कों की दशा भी बदतर होती जा रही है।
जनस्वास्थ्य विभाग के लिए दूषित पेयजल आपूर्ति की समस्याओं का समाधान करना आसान नहीं है। इस समय विभिन्न क्षेत्रों में लाइनें लीकेज करने से ये समस्या बनी है। विभाग हर 100 मीटर की दूरी पर सड़क खोदने को विवश है। तब जाकर सीवर व पेयजल लाइन की मिक्सिंग का पता चल पा रहा है। शहर में सीवर मिक्स पेयजल की आपूर्ति की शिकायतें सामान्य दिनों के मुकाबले मानसून सीजन में डेढ़ गुना हो गई हैं।
दरअसल, कई भागों में सीवर व पेयजल की लाइनें समांतर डली हुई हैं। कुछ जगहों पर तो सीमेंटिड पाइपलाइन हैं जो 40 साल पुरानी हो चुकी हैं। ऐसे में सीवर लाइनों का पानी पेयजल लाइन में और पेयजल लाइन का पानी सीवर लाइन में मिक्स हो रही है। इसके चलते ही दूषित पेयजल आपूर्ति की समस्या बनी हुई है। इस समय शहर के पांच हजार लोग इस समस्या को झेलने को विवश हैं। समस्या का स्थायी समाधान इन लाइनों को बदलना है। इसके लिए प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है लेकिन मानसून सीजन की वजह से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
- लंबे समय से सही नहीं पानी की गुणवत्ता
शहर में पेयजल की गुणवत्ता लंबे समय से नहीं है। जिस समय शहर का जलघर बना था उस समय ये मेन लाइनें बिछाई गई थी। ये मेन लाइनें अब जवाब दे चुकी हैं। इनके साथ-साथ ही सीवर की लाइनें भी बिछा रखी हैं। अब पेयजल लाइनों के जर्जर होने की वजह से इनमें सीवर का पानी मिक्स होकर सप्लाई हो रहा है। अब विभाग हर जगह लोहे की डीआई पाइप लाइनें बिछा रहा है। इन पाइप में जंग नहीं लगता और इनकी उम्र भी लंबी होती है।
- दूषित पानी के सेवन से गंभीर बीमारियों का खतरा
शहर के लोग लंबे समय से सीवरयुक्त पानी आपूर्ति की समस्या झेल रहे हैं। शहर के सभी भागों में यह समस्या बनी हुई है। वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो दूषित पेयजल के सेवन से मनुष्य पेट, लीवर, आंत, किडनी, चर्म रोग आदि का आसानी से शिकार हो सकता है। अगर पानी दूषित होने का अंदेशा है तो उसे उबालकर ही पीए।
- स्थायी समाधान के लिए विभाग ने तैयार की है ये योजना
जनस्वास्थ्य विभाग ने समस्या के स्थायी के लिए योजना तैयार कर रखी है लेकिन अब मानसून सीजन की वजह से इस योजना पर काम नहीं हो पा रहा है। इस योजना के तहत कई भागों में नई पेयजल लाइनें बिछाई जानी हैं। जलघरों से सभी बूस्टिंग तक अलग से लाइनें बिछाई जानी हैं। कंडम लाइनों को भी इसके तहत बदला जाना है। अगर यह योजना सिरे चढ़ जाती है तो दूषित पेयजल आपूर्ति की समस्या से स्थायी तौर पर राहत मिल जाएगी।
पेयजल आपूर्ति संबंधी समस्या के स्थायी समाधान के लिए विभाग ने परियोजना तैयार कर रखी है। जैसे ही मानसून सीजन खत्म होता है इस पर काम शुरू हो सकेगा। इसके तहत पुरानी लाइनों को बदला जाना है।
-सोहनलाल, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग