चरखी दादरी। जिले में दहेज प्रथा व बाल विवाह का खात्मा करने की दिशा में महिला एवं बाल विकास विभाग सतर्क हो गया है। विभाग की ओर से 30 दिन में 1034 सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
शादियोंं में बढ़ते दहेज के प्रचलन ने बेटी के माता- पिता की चिंता बढ़ा दी है। सोना-चांदी के दाम बढ़ने पर लड़की की शादी का बजट कई गुना बढ़ा है। जिले में हर वर्ष 600 से अधिक विवाह होते हैं। दहेज प्रथा को कानूनी दृष्टि से अपराध माना जाता है। पुराने समय में माता-पिता बेटी की शादी में भेंट स्वरूप कुछ बर्तन, कपड़े व अन्य घरेलू सामान देते थे।
माता-पिता इसे कन्यादान समझते थे। धीरे-धीरे इसने विस्तृत रूप ले लिया। पुराने समय में लोगों के पास नकद पैसा बहुत कम होता था। आजकल इस भेंट रूपी कन्यादान ने दहेज का बड़ा ले लिया है। लड़की की शादी में दहेज के रूप में ज्यादा मात्रा में नकदी, कार, जेवर व अन्य कीमती सामान दिया जाने लगा है ऐसे में गरीब वर्ग के लोगों के लिए बेटी की शादी करना जटिल कार्य हो गया है। भ्रूण हत्या होना भी इससे जुड़ा कारण माना जा सकता है। बेटी के जन्म को बोझ मान लिया जाता है।