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Charkhi Dadri News: पौने दो साल बाद भी पूरी नहीं हुई ड्रेन निर्माण परियोजना

Sat, 03 May 2025 10:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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फोटो 03
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जिले की मुख्य लोहारू कैनाल। संवाद
हर साल करीब साढ़े चार हजार एकड़ फसल में होता है जलभराव, कई गांवों में अधूरा पड़ा ड्रेन निर्माण कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। खेतों में जलभराव से निपटने के लिए ओपन व अंडरग्राउंड मिनी ड्रेनों के निर्माण का कार्य पौने दो साल में भी पूरा नहीं हो सका है। कई गांवों में यह काम अधूरा पड़ा है। मानसून सीजन में हर साल साढ़े चार हजार एकड़ में जलभराव होने से फसलों में नुकसान होता है।



सरकार की राज्य बाढ़ राहत कमेटी की स्वीकृति के बाद यह प्रोजेक्ट गति नहीं पकड़ पा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर करीब पांच करोड़ का बजट खर्च होना है। जिले के काफी क्षेत्र में हर साल बारिश से खेतों मेें जलभराव हो जाता है। खेतों में जलभराव होने पर किसानों की दो फसलेंं खराब हो जाती हैं। इससे किसान को मोटा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
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जमीन की उपजाऊ शक्ति भी बार-बार जलभराव होने से खत्म होने लगती है। सेम की समस्या बढ़ जाती है। इससे फसली दाना ही नहीं, अपितु, खरपतवार व अन्य किस्म के पौधे भी नहीं उगते। जमीन बंजर हो जाती है।
जिले के दिल्ली रोड पर कई गांवों में बारिश से जलभराव ज्यादा मात्रा में होता है। गांव इमलोटा, सरूपगढ़, सातौर, नीमली, कंहेटी, भागवी, बिगोवा, मोरवाला, अचीना ताल के अलावा साहुवास, फतेहगढ़ क्षेत्र में जलभराव से हर साल ज्यादा नुकसान होता है। पानी की निकासी के प्रबंध नहीं होने से हर साल दिक्कत बनी रहती है।
जिले के और भी कई गांव हैं, जहां जलभराव की समस्या होती है। मानसून सीजन में हर साल साढ़े चार हजार एकड़ में जलभराव हो जाता है। इससे करोड़ों रुपये का नुकसान होता है। लगातार तीन-चार माह तक खेतों में पानी भरा रहता है।
- वर्ष 2023 से चल रही है निर्माण प्रक्रिया
मुख्यमंत्री की संस्तुुति पर राज्य बाढ़ राहत कमेटी ने 2023 में जिले के ज्यादा जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी थी। इसके तहत गांव इमलोटा, भागवी, कंहेटी, सरूपगढ़, बिगोवा, मोरवाला व साहुवास को शामिल किया गया। इन गांवों को जोड़ते हुए अंडरग्राउंड व ओपन पाइपलाइनें बिछाई जानी हैं।
जहां पर्याप्त जमीन की उपलब्धता नहीं है, वहां अंडरग्राउंड पाइपलाइनें बिछाई जानी हैं। शेष क्षेत्र में ओपन लाइनोंं से काम चलाया जाएगा। लाइनों के बीच में कुछ दूरी के अंतराल में हौदी यानी छोटी टंकियां बनाई जानी हैं।
- शुरुआत से ही परियोजना में हो रही देरी

शुरुआत में तो काम वन विभाग की ओर से एनओसी नहीं मिलने की वजह से रुक गया था। बाद में कभी मानसून सीजन से काम प्रभावित रहा है तो कभी फसलों की बिजाई होने के बाद यह काम बीच-बीच में बंद रहा है।

इस समय गांव सरूपगढ़, साहुवास ड्रेनों का पूरा हो चुका है। गांव बिगोवा में अधूरा है। इमलोटा गांव में भी ड्रेन निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। गांव भागवी में भी अधूरा है। गांव कंहेटी में पूरा हो चुका है। इस प्रकार इन सभी गांवों में आठ हजार मीटर लंबी पाइपलाइनें बिछाई जानी हैं। इन गांवों का बारिश का पानी बधवाना व लोहारू में पानी डाला जाता है।
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वर्सन
30 जून तक यह प्राेजेक्ट पूरा कर लिया जाएगा। बीच-बीच में काम प्रभावित होता रहा है। खेतों में फसलों की वजह से काम नहीं हो सका है। फसल कटाई के बाद ही काम हो पाता है।

-सतेंद्र कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग
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