बिजाई के बाद अब मौसम पर फसल की पैदावार करेगी निर्भर, कम तापमान में सिंचाई करने से पैदावार पर पड़ता है प्रतिकूल असर
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। किसान रबी की फसल की रात के समय कम तापमान में सिंचाई न करें। इससे फायदा के बजाय नुकसान हो सकता है। वहीं, आने वाले दिनों में सरसों में रोगों के बढ़ने की आशंका भी ज्यादा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लिए पहले से ही किसानों को सतर्क रहना होगा, जैसे ही किसी रोग के लक्षण सामने आएं, किसान कृषि विशेषज्ञों की सलाह लें।
इस बार रबी सीजन में किसानों ने अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में ही सरसों की बिजाई कर दी थी। नवंबर प्रथम सप्ताह तक सरसों की बिजाई पूरी हो गई। किसान सरसों की एक सिंचाई कर चुके हैं। रेतीले भागों में तो दो से तीन सिंचाई करनी पड़ती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कम तापमान में रात के समय फसल की सिंचाई न करें। इससे फसल में फायदा के बजाय नुकसान हो सकता है। सिंचाई दिन के समय ही करनी चाहिए।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि आने वाले कुछ दिनों में सरसों में रोग लगे सकते हैं। इसके लिए किसानों को अभी से सतर्क रहने की जरूरत है। सफेद रतवा रोग में सफेद धब्बे हो जाते हैं। टहनी सिकुड़कर जलेबी का आकार ले लेती है। यह रोग शुरुआत मेंं खेत के किनारों में लगता है। बाद मेंं पूरे खेत में फैल जाता है। इस रोग का सबसे बढिय़ा निदान इस जलेबीनुमा मरोड़ी खाई टहनी को तोड़कर खेत से बाहर फेंकना उचित है।
उसके बाद जिंक व यूरिया का घोल मिलाकर स्प्रे कर देना चाहिए। ताकि, फुटाव हो सके। जिंक की मात्रा 500 ग्राम व यूरिया दो किलोग्राम होनी चाहिए। 100 लीटर पानी में इसका घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।
- नमी बढ़ने पर होता है हरा तेला रोग
सरसों में हरा तेला रोग नमी की मात्रा बढ़ने पर होता है। यह हरा मच्छर होता है जो पौधे से रस चूसता है। इसके लिए मैटोसिसटोक्स 250 मिलीग्राम दवा 150 लीटर पानी मेंं मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। इसी प्रकार, एक अन्य दवा मैलिथियान 300 मिलीग्राम 150 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। बताया कि इस बार भी सरसों की बिजाई आंकड़ा ज्यादा ही है। 2020 प्रदेश में सरसों की बिजाई का आंकड़ा 3.50 लाख हेक्टेयर था।
- हर साल बढ़ रहा सरसों का बिजाई रकबा
वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 5.50 लाख हेक्टेयर रहा। मौजूदा रबी सीजन में यह आंकड़ा 5.55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है। दादरी जिले में बिजाई का आंकड़ा 54 हजार हेक्टेयर क्षेत्र है।अब भविष्य में मौसम पर फसल की पैदावार निर्भर करेगी। अगर मौसम अनुकूल बना रहा तो प्रति एकड़ 12 क्विंटल तक पैदावार होने का अनुमान है।
वर्सन:
किसान रात को ज्यादा कम तापमान में सिंचाई न करें। इससे पौधे खराब होने की आशंका बनी रहती है। इसका औसत पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। किसान दिन के समय ही फसल की सिंचाई करें।
-जितेंद्र सिहाग, खंड कृषि अधिकारी
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खेत में खड़ी सरसों की फसल। फाइल फोटो