चरखी दादरी। आधुनिक जीवनशैली में मोबाइल और गैजेट्स का बढ़ता प्रयोग स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। कभी उम्रदराज लोगों की समस्या मानी जाने वाली सर्वाइकल की बीमारी अब युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रही है। दादरी के नागरिक अस्पताल स्थित फिजियोथेरेपी ब्लॉक में हर रोज काफी संख्या में मरीज गर्दन, हाथ, सिर दर्द आदि की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
नागरिक अस्पताल में तैनात फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. लोकेश मलिक के अनुसार 30 वर्ष से कम उम्र के युवाओं में सर्वाइकल का मुख्य कारण मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग है। देर रात तक झुककर फोन चलाना, गलत मुद्रा में बैठकर तथा घंटों तक गर्दन झुकाकर गैजेट्स का इस्तेमाल करने से गर्दन की हड्डियों और मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। बिस्तर पर लेटकर मोबाइल चलाने से गर्दन के स्वाभाविक कर्व पर बुरा असर पड़ता है, जिससे नसों में दबाव शुरू हो जाता है।
30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में भी यह समस्या बढ़ती जा रही है। इसके पीछे मुख्य कारण भारी वजन उठाना, काम के दौरान गलत तरीके से बैठना और सोते समय दो-तीन तकियों का इस्तेमाल करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचे तकिये लगाकर देर रात तक टीवी देखने या फोन चलाने से गर्दन की हड्डी की बनावट में बदलाव आने लगता है, जो आखिर में नसों के दबने का कारण बनता है।
इस वजह से होती है परेशानी
नागरिक अस्पताल में तैनात फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. लोकेश मलिक ने बताया कि गर्दन की हड्डी में नसों के दबने के कारण यह परेशानी शुरू होती है। जब मांसपेशियों में खिंचाव आता है या डिस्क पर दबाव पड़ता है, तो यह दर्द केवल गर्दन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हाथों में झनझनाहट, सिरदर्द और चक्कर आने जैसी समस्याएं भी पैदा करता है।
सर्वाइकल का केवल फिजियोथेरेपी में उपचार संभव
डॉ. मलिक का कहना है कि लोग दर्द होने पर तुरंत पेनकिलर्स का सेवन कर लेते हैं। जबकि पेनकिलर्स से केवल कुछ समय के लिए दर्द को दबाया जा सकता है, लेकिन यह सर्वाइकल की बीमारी का जड़ से इलाज नहीं है। सर्वाइकल का पूर्ण उपचार केवल फिजियोथेरेपी और काइरोप्रैक्टिक तकनीक से ही संभव है।
इन बातों का रखें ध्यान
डॉ. लोकेश मलिक ने बताया कि सर्वाइकल से बचाव के लिए मोबाइल फोन का उपयोग करते समय उसे आंखों के लेवल पर रखें। सोते समय पतले तकिये का प्रयोग करें या बिना तकिये के सोएं। लगातार बैठकर काम करने के दौरान हर 30 मिनट में गर्दन से संबंधित व्यायाम करें। भारी वजन को सिर पर उठाने से बचें।
फिजियोथैरेपी तकनीक से दबी हुई नसों को सही स्थिति में लाया जाता है और व्यायाम के जरिए मांसपेशियों को मजबूत किया जाता है, जिससे मरीज को बिना दवाओं के राहत मिलती है। यदि समय रहते हमने अपनी आदतों में सुधार नहीं किया तो यह समस्या और भयावह रूप ले सकती है।
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