चरखी दादरी। प्राइमरी स्कूल की तर्ज पर ही राजकीय बाल वाटिकाओं में बच्चों को दोपहर के भोजन मिलगा। भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि बाल्यावस्था में स्वास्थ्य का ठीक प्रकार से विकास एवं वृद्धि हो सके। जिले की विभिन्न बाल वाटिकाओं में 1,014 विद्यार्थियों का दाखिला हो चुका है।
शिक्षा विभाग ने वर्तमान शैक्षिक सत्र में कक्षा पहली में दाखिला की आयु साढ़े पांच वर्ष निर्धारित कर रखी है। एक सितंबर 2024 को जिस बच्चे की आयु छह साल पूरी हो जाएगी, तब वह पहली कक्षा में दाखिला का पात्र है। साढ़े पांच साल से नीचे आयु के बच्चों के लिए विभाग ने बाल वाटिकाएं शुरू की हैं, ताकि बच्चा खेल-खेल में शिक्षण कार्य कर सकें। बाल वाटिकाओं में शिक्षण कार्य के साथ विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। क्योंकि बाल्यावस्था में बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक तेज गति से होता है।
बाल वाटिकाओं में विद्यार्थियों के लिए दोपहर के भोजन की भी व्यवस्था की गई है, ताकि बाल विद्यार्थी का शारीरिक विकास भी सही ढंग से होता रहे और वह कुपोषण का शिकार न होने पाए। आज देश में लगभग तीसरा बालक कुपोषण का शिकार बना हुआ ह। इस कारण बालक की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर रह जाती है। वह कुष्ठ व रोगों का भी शिकार हो जाता है।
निजी प्ले स्कूल की तर्ज पर खोली गईं बाल वाटिकाएं
सरकार ने प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर बाल वाटिकाएं खोली हैं, ताकि राजकीय स्कूलों में विद्यार्थी संख्या बढ़ सके। जिले में 1,014 विद्यार्थियों ने बाल वाटिकाओं में दाखिला ले लिया है। यह दाखिला संख्या अभी और बढ़ेगी, क्योंकि बाल वाटिकाओं में दाखिला तकरीबन पूरे साल होने हैं।
भोजन में यह मिलेगा
चना, बाजरा, कढी-पकौड़ा, पूरी- सब्जी, भरवा परांठा, राजमा सब्जी, चपाती, आलू पराठा, चावल, मंगू खिचड़ी, दूध, गेहूं, दलिया, छोला-पूरी।
बाल वाटिकाओं में दोपहर के भोजन का मेन्यू प्राइमरी स्कूल वाला ही रहेगा। भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि बाल्यावस्था में स्वास्थ्य का ठीक प्रकार से विकास एवं वृद्धि हो सके। - राजबाला मलिक, बीईओ, शिक्षा विभाग