चरखी दादरी। पुराना शहर स्थित बाबा स्वामी दयाल धाम पर जन्माष्टमी पर्व के अवसर पर श्रद्धा और आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। जिलेभर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और बाबा स्वामी दयाल की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचने का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा।
मंदिर में हर वर्ष जन्माष्टमी पर्व पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इस बार भी मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में मेले को लेकर विशेष तैयारियां की गई थीं। सुबह करीब चार बजे से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर में जुटनी शुरू हो गई थी। श्रद्धालुओं ने बाबा स्वामी दयाल के समक्ष माथा टेककर पूजा-अर्चना की और परिवार के लिए सुख-शांति व समृद्धि की प्रार्थना की। कई श्रद्धालु दूर-दराज के गांवों और अन्य शहरों से विभिन्न साधनों से मंदिर पहुंचे।
विशेष दान की रही परंपरा
बाबा स्वामी दयाल मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की ओर से विशेष रूप से झाड़ू, उपले और दही का दान किया जाता है। श्रद्धालुओं ने मंदिर में पहुंचकर अपनी श्रद्धा अनुसार इन वस्तुओं का दान किया। मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने मेले में लगी विभिन्न दुकानों पर खरीदारी भी की।
रात को भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ माहौल
जन्माष्टमी पर्व पर मंदिर परिसर में रात्रि के समय भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। राजेश थूराना एंड पार्टी की ओर से प्रस्तुत किए गए भजनों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भजन-कीर्तन के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूब गया। श्रद्धालु देर रात तक भजनों का आनंद लेते रहे और बाबा स्वामी दयाल का गुणगान किया। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने भजनों पर तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
स्वयंसेवकों ने संभाली व्यवस्था
जन्माष्टमी मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए मंदिर कमेटी की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के लिए कमेटी ने वालंटियर नियुक्त किए थे। वहीं प्रशासन की ओर से महिला व पुरुष पुलिस कर्मचारियों को लगाया गया था।
वालंटियरों ने श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से दर्शन करवाने के साथ ही मंदिर परिसर में व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया। मंदिर कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे जन्माष्टमी पर्व शांतिपूर्ण और श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ।