चरखी दादरी। रबी सीजन की बिजाई शुरू होने से पहले जिले में डीएपी खाद की उपलब्धता कम बनी हुई है। रबी फसलों की बिजाई 15 अक्तूबर से शुरू होने जा रही है। ऐसे में किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध करवाना कृषि विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। सरसों की बिजाई के दौरान डीएपी की मांग बढ़ने के कारण इसकी उपलब्धता को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।
जिले में करीब 2 लाख 73 हजार एकड़ कृषि योग्य रकबा है। इस बार सरसों की बिजाई का रकबा करीब 1 लाख 50 हजार एकड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। जिले में अब तक 3924 मीट्रिक टन यूरिया और 761 मीट्रिक टन डीएपी खाद की आवक हुई है। किसानों को उनके क्षेत्र में ही खाद उपलब्ध करवाने के लिए 16 पैक्स समितियों के माध्यम से वितरण व्यवस्था करने की जरूरत बताई जा रही है। इससे किसानों को खाद लेने के लिए दूर के केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और वितरण व्यवस्था भी सुचारु रह सकेगी।
रबी सीजन में 13 हजार एमटी डीएपी की जरूरत
कृषि विभाग के अनुसार रबी सीजन में जिले में करीब 13 हजार मीट्रिक टन डीएपी खाद की आवश्यकता रहेगी। इसी प्रकार यूरिया की कुल मांग करीब 29 हजार मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। इसके अलावा एनपीके खाद की करीब तीन हजार और एसएसपी खाद की करीब सात हजार मीट्रिक टन आवश्यकता रहेगी। विभाग ने फसलों और कृषि योग्य भूमि के रकबे के अनुसार खाद की मांग भेजी है तथा जरूरत के मुताबिक अलग-अलग महीनों में खाद की आवक करवाने की योजना है।
नवंबर तक 8 हजार मीट्रिक टन खाद की जरूरत
अक्तूबर में यूरिया की दो हजार, डीएपी की चार हजार, एनपीके की एक हजार और एसएसपी की पांच हजार मीट्रिक टन जरूरत रहेगी। नवंबर में यूरिया आठ हजार, डीएपी आठ हजार, एनपीके दो हजार और एसएसपी एक हजार मीट्रिक टन की मांग रहेगी। दिसंबर में यूरिया आठ हजार और डीएपी एक हजार मीट्रिक टन की आवश्यकता होगी। जनवरी में करीब 10 हजार मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत रहने का अनुमान है।
दिसंबर तक बनी रहेगी खाद की मांग
रबी सीजन में शुरुआत में सरसों की बिजाई होगी। इसके बाद नवंबर के प्रथम सप्ताह से गेहूं की अगेती बिजाई शुरू हो जाएगी। गेहूं की पछेती किस्मों की बिजाई 25 दिसंबर तक की जा सकेगी। ऐसे में दिसंबर तक डीएपी और यूरिया की मांग बनी रहेगी। दिसंबर में फसलों की सिंचाई शुरू होने के बाद यूरिया की खपत बढ़ने की संभावना है क्योंकि किसान पहली और दूसरी सिंचाई के दौरान यूरिया का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में विभाग की ओर से मांग के अनुरूप महीनेवार खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
विभाग व सरकार को रबी सीजन के लिए खाद का उचित प्रबंध करना चाहिए ताकि किसानों को समय रहते पर्याप्त मात्रा में खाद मिल सके। किसानों को खरीद केंद्रों के बाहर लंबी लाइन नहीं लगानी पड़े।
- हरपाल सिंह भांडवा, जिला अध्यक्ष, भाकियू।
खाद की कमी नहीं रहने दी जाएगी। बिजित रकबा के आधार पर खाद बांटी जाएगी। बिजाई के समय ही डीएपी की जरूरत होती है। किसान रासायनिक खादों का कम इस्तेमाल करें। जैविक एवं देशी खाद ज्यादा फायदेमंद होता है।
- डॉ. जितेंद्र कुमार, खाद नियंत्रक, कृषि विभाग