चरखी दादरी में लबालब भंडारण टैंक।
चरखी दादरी। जिले के गांवों में बनाए गए 80 जलकुंड से किसान फसल की सिंचाई कर सकेंगे। इन जलकुंडों में केवल बारिश का पानी ही डलेगा। नहरी पानी से इन्हें नहीं भरा जाएगा। बारिश के पानी को बाद में पीने में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। इन पक्के जलकुंड को ऊपर से ढका गया है। इनके जरिये पेड़-पौधों की सिंचाई भी की जा सकती है।
बारिश का पानी संचित कर इन कुंडों को भरा जाता है। पिछले एक दशक से मानसून की बारिश कम होने की वजह से भूमिगत जलस्तर घटता जा रहा है। जलवायु परिवर्तन की वजह से ग्लेशियर पिघल रहे हैं। इससे नहरों मेंं भी पानी का टोटा बना रहता है। आने वाले समय में हालात और विकट हो जाएंगे।
जिले के बाढड़ा उपमंडल में पेयजल व सिंचाई के लिए हालात बेहद खराब हैं। इस क्षेत्र में जमीनी पानी 400 फीट नीचे है। अब यह खारा होने लगा है। जमीनी पानी रिचार्ज नहीं होने की वजह से पानी सोडिक व लवणीय होने लगा है। फसलों की सिंचाई के लिहाज से भी गुणवत्तापरक नहीं है। गिरते भूमिगत जलस्तर को सुधारने की दिशा में सरकार की ओर से भी खासे प्रयास किए गए हैं। इसके तहत जमीनी बोरिंग भी किए गए हैं। गांवों में सोख्ता गड्ढे बनाए गए हैं। ताकि, पानी जमीन में जाकर रिचार्ज हो सके।
- तलहटी को पक्का कर ढके गए थे कुंड
पिछले दिनों बनाए गए 80 जलकुंड की तलहटी को पक्का बनाया गया है। ऊपर से इनको ढका गया है। ताकि, पानी की गुणवत्ता बनी रहे और इसका लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सके। ये कुंड ज्यादातर बाढड़ा उपमंडल के गांवों मेंं बनाए गए हैं। ग्राम पंचायत व शामलात जमीन पर बनाए गए हैं। ताकि, जमीनी पानी भी रिचार्ज होता रहे और पानी का घरेलू कार्यों में भी इस्तेमाल किया जा सके।
जलकुंड के पानी से पौधों की सिंचाई की जा सकेगी। किसान फसल की सिंचाई भी कर सकते हैं। वर्षा जल संचयन में जलकुंड कारगर साबित हो रहे हैं।
-खुर्शीद अहमद, जन सूचना, संचार एवं जल विशेषज्ञ