चरखी दादरी। नगर परिषद कार्यालय के मुख्य गेट पर वर्षों पुराने बरगद के पेड़ को काटने पर शनिवार को विवाद हो गया। पेड़ की कटाई शुरू होते ही पार्षद मौके पर पहुंच गए और इसका विराेध किया। पार्षदों के विरोध के बाद पेड़ काट रहे कर्मचारी मौके से खिसक गए।
बता दें कि शनिवार दोपहर को नगर परिषद के मुख्य द्वार के समीप लगे पेड़ की मोटी शाखाएं काटी जा रही थीं। सूचना मिलते ही वार्ड-8 से पार्षद नवीन प्रजापति, वार्ड-9 से पार्षद विनोद सिंहमार, वार्ड-17 से पार्षद सुधीर स्वामी, वार्ड-20 से पार्षद प्रतिनिधि विरेंद्र सांगवान चरखी, वार्ड-दो से पार्षद प्रतिनिधि नरेंद्र दहिया मौके पर पहुंचे।
बाद में पार्षदों ने सोमवार को इस संबंध में एफआईआर दर्ज करवाने के लिए शिकायत देने की बात कही। पार्षदों ने कहा कि बिना मंजूरी और पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन किए किसी भी हरे-भरे पेड़ को नहीं काटा जा सकता। पार्षदों का कहना है कि यदि पेड़ किसी प्रकार से जर्जर या खतरनाक स्थिति में है तो इसकी जांच विशेषज्ञों से करवाई जाए, लेकिन सीधे तौर पर कटाई करना गलत है। मौके पर पहुंचे पार्षदों ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में बिना अनुमति इस प्रकार की कार्रवाई की गई तो वे इसके खिलाफ बड़ा आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि शहर में हरियाली पहले ही कम होती जा रही है, ऐसे में पुराने पेड़ों को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
पार्षद नवीन प्रजापति ने कहा यह बरगद का पेड़ वर्षों से नगर परिषद कार्यालय की पहचान बना हुआ है। बिना किसी पूर्व सूचना या प्रस्ताव के इसे काटना पूरी तरह गलत है। पार्षद विनोद सिंहमार ने कहा कि शहर में पहले ही हरियाली कम हो चुकी है। यदि इस प्रकार शहर के पुराने पेड़ों को काटा जाएगा तो शहर में हरियाली शून्य हो जाएगी।
पार्षद सुधीर स्वामी ने कहा कि नगर परिषद को पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए। किसी भी कीमत पर इस प्रकार के पुराने पेड़ को काटने की कार्रवाई करना उचित नहीं है। अगर यह किसी कारण से नुकसानदायक है तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। वार्ड 20 से पार्षद प्रतिनिधि विरेंद्र सांगवान चरखी ने कहा कि नगर परिषद के संसाधनों को धीरे धीरे खत्म किया जा रहा है।
पेड़ काटने के लिए किसी विभाग से अनुमति नहीं ली गई है। नगर परिषद सचिव गौरव कुमार से पेड़ काटने को लेकर बात हुई तो उन्होंने कहा कि इस बारे में कार्यकारी अधिकारी बता सकते हैं, लेकिन काफी प्रयास करने के बाद भी कार्यकारी अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका।