फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्लब फुट क्लीनिक : परिजनों ने समय पर करवाया टेढ़े पैरों का उपचार, जूते पहन चलने लगे 11 बच्चे

विज्ञापन
बच्चे को स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिए गए क्लब फुट जूते। संवाद
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

चरखी दादरी। माता-पिता के समय पर टेढ़े पैरों की तरफ ध्यान देकर उपचार करवाने से 11 बच्चे अब अपने पैरों पर चलने लगे हैं। इन बच्चों का उपचार सिविल अस्पताल के क्लब फुट क्लीनिक में चल रहा है और 50 फीसदी का उपचार एक साल के अंदर पूरा हो जाएगा। इसके बाद उन्हें इस टॉलिप्स नामक जन्मजात बीमारी से छुटकारा मिल जाएगा।
हाल ही में विभाग व फाउंडेशन ने चार बच्चों को क्लब फुट जूते और ब्रेस दिए हैं। ये प्रक्रिया सीएमओ डॉ. विनोद कुमार ने अपनी उपस्थित में पूरी करवाई। सिविल अस्पताल में टॉलिप्स (पैरों का अंदर की ओर मुड़ना) बीमारी का उपचार निशुल्क मिलने से बच्चों के परिजनों को काफी राहत मिली है। यह सुविधा दादरी में शुरू करने के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अब तक 11 बच्चे उपचार करवाकर अपने पैरों पर चलने लगे हैं।
विज्ञापन

दिसंबर 2020 से पहले दादरी में टॉलिप्स के उपचार की सुविधा नहीं थी। मरीजों को चार साल तक के बच्चे के उपचार के लिए रोहतक पीजीआई या भिवानी सिविल अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते थे। वहीं, जागरूकता के अभाव में समय पर इस बीमारी का उपचार न कराने पर बच्चा ताउम्र अपने पैरों पर चल नहीं पाता। ऐसे में टॉलिप्स का शिकार बने बच्चों के लिए स्वास्थ्य विभाग क्लब फुट क्लीनिक नामक साप्ताहिक सेवा मुहैया करवाना शुरू किया। इसके तहत हर मंगलवार को सिविल अस्पताल में टॉलिप्स से ग्रस्त लोगों का उपचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह बीमारी बेहद घातक है और अभिभावकों को इस बीमारी से ग्रस्त बच्चों का उपचार समय रहते कराना चाहिए।


11 में से 8 बच्चों का उपचार जन्म के 15वें दिन हुआ शुरू
डॉ. सोनिया ने बताया कि दादरी क्लब फुट क्लीनिक में 11 बच्चों का उपचार चल रहा है। इनमें से आठ बच्चे ऐसे हैं जिनके जन्म के 15वें दिन ही उपचार शुरू कर दिया गया। एक सप्ताह पहले जन्मा एक बच्चा भी टॉलिप्स से ग्रस्त है और जन्म के 15वें दिन उस बच्चे के अभिभावकों को भी क्लब फुट क्लीनिक पर उपचार शुरू करवाने के लिए बुलाया जाएगा और इसके बाद संख्या 12 हो जाएगी।

- 12 से 13 प्लस्तर से होते हैं पांव ठीक

अगर किसी बच्चे के दोनों पांव जन्म से अंदर की ओर मुड़े हैं तो दो विधियों के जरिये उसका उपचार किया जाता है। प्लस्तर विधि में 12 से 13 प्लस्तर किए जाते हैं और इस विधि में तीन से चार माह का समय लग जाता है। ऑपरेशन विधि से ज्यादा लोग प्लस्तर विधि को तवज्जो देते हैं।


50 हजार है निजी तौर पर खर्च

प्राइवेट तौर पर टॉलिप्स का उपचार महंगा है। आर्थिक रूप से कमजोर लोग खर्च वहन नहीं कर पाते। यहीं कारण है कि बीमारी से ग्रस्त बच्चे को आगे चलकर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार एक विजिट का खर्च करीब चार हजार है और इस लिहाज से 13 विजिट का खर्च 50 हजार से अधिक बैठता है।
विज्ञापन





क्लब फुट क्लीनिक में इस समय 11 बच्चों का उपचार चल रहा है। ये बच्चे अब अपने पांव पर चलने लगे हैं। पांच साल उपचार की समय अवधि रहती है। जो अभिभावकों अपने बच्चों का उपचार करवा रहे हैं और इसे अधर में न छोड़े। - डॉ. अंकुर नागर, डिप्टी सीएमओ एवं नोडल अधिकारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें