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Charkhi Dadri News: स्वास्थ्य सेवाएं बीमार, रेफर केंद्र बना अस्पताल

Tue, 17 Sep 2024 05:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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 चरखी दादरी सिविल अस्पताल जहां जिला स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। संवाद
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चुनाव मुद्दा::
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जिला बनने के साढ़े सात साल बाद भी दादरी सिविल अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी नहीं हुई दूर, मरीज झेल रहे परेशानी
स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और सरकार अब तक मरीजों को मुहैया नहीं करवा पाए जिलास्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। दोनों हलकाें की करीब छह लाख की आबादी को जिलास्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका कारण जिला स्वास्थ्य विभाग में संसाधनों और विशेषज्ञों की कमी होना है। इनके अभाव में दादरी सिविल अस्पताल रेफर केंद्र बनकर रह गया है। हर रोज करीब 25 फीसदी दूसरे जिलों में रेफर किए जा रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी भी जिले में चुनावी मुद्दा है।
इस समय जिले के सभी 17 स्वास्थ्य केंद्रों की दैनिक ओपीडी 2500 के पार चल रही है। अकेले सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी 1300 तक पहुंची है। दूसरी ओर संसाधनों और विशेषज्ञों की कमी के चलते मरीजों को दूसरे जिलों में रेफर किया जा रहा है। इनमें से रोजाना 300 से अधिक मरीज दूसरे जिलों में उपचार के लिए रेफर किए जा रहे हैं।
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बता दें कि दादरी को जिला बने साढ़े सात साल से अधिक समय हो चुका है। लेकिन, अब तक सिविल अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी दूर नहीं हुई है। विशेषज्ञों की कमी के चलते जिले से हर माह औसतन चार हजार मरीज रेफर किए जा रहे हैं। वहीं, जिला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद अब तक विशेषज्ञों की जिले में तैनाती नहीं हो पाई है। इसका सीधे तौर पर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है।
ईएनटी स्पेशलिस्ट न होने के चलते मरीजों को भिवानी सिविल अस्पताल जाकर उपचार करवाना पड़ रहा है। यही स्थिति अल्ट्रासाउंड सुविधा की है। निशुल्क सेवा का लाभ उठाने के लिए मरीज रोहतक पीजीआई और भिवानी अस्पताल जाने के लिए मजबूर हैं। भागदौड़ से बचने के लिए काफी मरीज निजी केंद्रों पर जाकर अल्ट्रासाउंड करवा रहे हैं। सिविल अस्पताल में सरकारी अल्ट्रासाउंड सेवा न होने से मरीज निजी केंद्रों पर जाकर जेब ढीली करने के लिए विवश हैं। मामला संज्ञान में होते हुए भी स्वास्थ्य विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
- एक लाख बच्चों पर नहीं है एक भी बाल रोग विशेषज्ञ

जिले में बच्चों की संख्या करीब एक लाख है। बड़ी बात यह कि जिले में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। लंबे इंतजार के बाद जिले में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई थी, लेकिन विशेषज्ञ का ट्रांसफर हो गया। इस समय जिले में बाल रोग विशेषज्ञ का पद खाली पड़ा है। वहीं, इस मौसम में बच्चे बीमारियों की चपेट में ज्यादा आ रहे हैं। ऐसे में परिजनों को निजी अस्पताल में जाकर बच्चों को उपचार करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

- इन विशेषज्ञों और सुविधाओं की भी खल रही कमी

दादरी जिले में इस समय फिजिशयन, ईएनटी स्पेशलिस्ट, एमडी मेडिसिन, जरनल सर्जन, मनोरोग विशेषज्ञ आदि नहीं हैं। लंबे समय से इनके पद खाली पड़े हैं। करीब 30 से अधिक बार डिमांड भेजने के बाद भी तैनाती नहीं हो पाई है। दादरी के जिला बनने के बाद से अल्ट्रासाउंड सेवा बंद है। वहीं, एमआरआई और सिटी स्कैन के मरीज भी भिवानी भेजे जा रहे हैं। ये दोनों सुविधाएं भी सिविल अस्पताल में नहीं हैं।



- तीनों सीएचसी में नहीं एक्स-रे सुविधा
इस समय जिले के बौंदकलां, झोझूकलां और गोपी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक्स-रे सुविधा नहीं है। इसके चलते एक्स-रे के लिए ग्रामीण क्षेत्र के मरीज सिविल अस्पताल पर निर्भर हैं। कई मरीज भागदौड़ से बचने के लिए प्राइवेट केंद्र में जाकर अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए विवश हैं।
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वर्सन:
विशेषज्ञों की तैनाती के लिए डिमांड मुख्यालय भेज चुके हैं। आचार संहिता हटने के बाद तैनाती होने की उम्मीद है। इस समय सामान्य बीमारियों से ग्रस्त मरीजों की संख्या बढ़ी हुई है। अस्पताल की दैनिक ओपीडी करीब 1300 है।

-डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ, स्वास्थ्य विभाग


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चरखी दादरी सिविल अस्पताल, जहां जिलास्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। संवाद
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