चरखी दादरी सिविल अस्पताल जहां बाल रोग विशेषज्ञ का पद खाली है।
चरखी दादरी। जिले में बच्चे कड़ाके की ठंड की चपेट में आकर बीमार पड़ रहे हैं जबकि सिविल अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ ही तैनात नहीं है। विशेषज्ञ का पद करीब दो माह से खाली है। इस समय सिविल अस्पताल में बच्चों के उपचार की कोई सुविधा नहीं है। ऐसे में निजी अस्पताल ही बच्चों का उपचार कराने का एकमात्र विकल्प हैं।
बता दें कि दादरी सिविल अस्पताल में 28 साल बाद मई 2023 में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई थी। करीब पांच माह तक जिले में बाल रोग विशेषज्ञ ने सेवाएं दीं और दो माह पहले ही उनका तबादला हो गया। इसके बाद सरकार ने महिला बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती की, लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। ऐसे में पिछले दो माह से ये पद खाली है।
दूसरे ओर ठंड का कहर लगातार जारी है और माता-पिता के तमाम कोशिश करने के बाद भी बच्चे ठंड की चपेट में आ रहे हैं। पांच दिन पहले ही जिले के गांव कंहेटी निवासी तीन माह का बच्चा हिसार में स्वाइन फ्लू संक्रमित मिल चुका है। बच्चा एक जनवरी से बीमार था और दादरी में बाल रोग विशेषज्ञ की सुविधा न होने के चलते परिजन बच्चे को पहले भिवानी और फिर हिसार के एक अस्पताल में ले गए। वहां बच्चे के स्वाइन फ्लू संक्रमित होने की पुष्टि हुई। इसके बाद विभाग की टीम कंहेटी पहुंची और 45 संदिग्धों के सैंपल लिए। उनमें से आठ सैंपलों की इंफ्लूएंजा रिपोर्ट आनी बाकी है।
निजी अस्पतालों में हर माह चुकाने पड़ते हैं करीब 21 लाख
शहर में मुख्य पांच निजी अस्पतालों में छोटे बच्चों का उपचार होता है। सूत्रों की मानें तो एक अस्पताल की दैनिक ओपीडी औसतन 40 रहती है और प्रति बच्चा ओपीडी फीस 150 से 170 रुपये निर्धारित है। इस दौरान कम से कम 200 रुपये की दवा भी दी जाती है। इस लिहाज से एक बार उपचार पर करीब 350 रुपये खर्च आता है। इस लिहाज से उपचार के लिए प्रति माह वहां बच्चों के माता-पिता को करीबन 21 लाख रुपये चुकाने होते हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती की मांग हेड ऑफिस भेज चुके हैं। तैनाती होते ही सिविल अस्पताल में बच्चों के उपचार की बेहतर सुविधा मिलने लगेगी। जल्द ही विशेषज्ञ की तैनाती हो जाएगी।
-डॉ. गौरव भारद्वाज, कार्यवाहक सीएमओ