चरखी दादरी। जिला चरखी दादरी में फिलहाल बच्चों के प्रति अपराध बहुत कम है, जो कि हमारे लिए संतोष की बात हो सकती है। इसके बावजूद आमजन को बच्चों की सुरक्षा के लिए निरंतर जागरूक करते रहना चाहिए। यह बात नगराधीश रेणुका नांदल ने सोमवार को महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से बाल कानूनी अधिकारों पर आयोजित कार्यशाला में कही।
लघु सचिवालय सभागार में आयोजित कार्यशाला में नगराधीश ने कहा कि बच्चे काफी संवेदनशील होते हैं, ऐसे में सभी को जागरूक रहकर इन पर अधिक ध्यान देना होगा। महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी गीता सहारण ने कहा कि बच्चों के पालन-पोषण और उनकी देखभाल के लिए हर एक गांव और शहर के वार्डों में आंगनबाड़ी सेंटर्स पर माताओं को आवश्यक जानकारी दी जाती है।
बाल संरक्षण समिति की चेयरपर्सन शिल्पी मड़िया ने कहा कि किसी बच्चे के साथ कोई वारदात होती है तो समिति के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचकर मामले की जानकारी लेते हैं और सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस की मदद ली जाती है।
बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया की साझा
कार्यशाला में एडवोकेट सुरेश यादव, गुलजारी लाल गुप्ता और विजय चौहान ने बच्चों के गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों को भी अपने थानों में बच्चों व माताओं के लिए एक मित्र कक्ष स्थापित करना चाहिए। जहां वे बिना किसी भय के अपनी बात कह सकें।
ये रहे मौजूद
कार्यशाला में जिला बाल संरक्षण अधिकारी नीलकमल, अर्चना, विकास सांगवान, ऊषा रानी, खंड शिक्षा अधिकारी कंवर सिंह, अमित, महिला थाना प्रभारी सोनिया, एएसआई अशोक कुमार, विजय यादव, कुलदीप, सुरेंद्र, डिप्टी सीएमओ डाॅ. सुनैना ग्रोवर, एडवोकेट धीरज सैनी, श्रम निरीक्षक प्रदीप कुमार आदि मौजूद रहे।