चरखी दादरी। एक अक्तूबर से अनाज मंडियों में सरकारी बोली पर खरीफ की फसलों की खरीद शुरू हो गई है। फसल खरीद के पहले दिन सिर्फ दस किसान ही फसल को लेकर मंडी में पहुंचे। पहले दिन सरकारी भाव पर 335 क्विंटल बाजरा की खरीद की गई है।
कपास व अन्य खरीफ की फसलों की खरीद शनिवार को शून्य रही। सरकारी भाव पर शनिवार को हैफेड कंपनी द्वारा फसल की खरीद की गई। इस साल सरकार ने बाजरा के समर्थन मूल्य में 100 रुपये की बढ़ोतरी करते हुए 2350 रुपये प्रति क्विंटल तय कर रखा है। बाजरा की सरकारी खरीद से पहले किसान मंडी में खुले भाव में औसतन 1800 रुपये प्रति क्विंटल रुपये के हिसाब से फसल बेचने को विवश थे।
सरकारी बोली पर बाजरा की फसल को बेचने के लिए जिले भर से कुल 35157 किसानों ने पंजीकरण करवा रखा है जबकि कपास की फसल के लिए 11270 किसानों ने पंजीकरण करवा रखा है। वहीं, मूंग की फसल के लिए सिर्फ 1897 किसानों ने अपना पंजीकरण करवाया है।
अगर ब्लॉक के अनुसार बात की जाए तो बाजरा के लिए दादरी ब्लॉक से सबसे अधिक किसानों ने पंजीकरण करवाया है। दादरी से 18314 किसानों ने पंजीकरण करवाया है। इसके बाद बाढड़ा से 14196 किसानों ने सरकारी रेट पर फसल बेचने के लिए पंजीकरण करवाया है जबकि बौंदकलां में सिर्फ 3166 किसानों ने ही अपना पंजीकरण करवाया है।
इसी प्रकार कपास के लिए सबसे अधिक पंजीकरण दादरी व बाढड़ा ब्लॉक के किसानों ने करवाया है। कपास के लिए दादरी से 5226 किसानों ने पंजीकरण करवाया है। वहीं, बाढड़ा से 4312 किसानों ने पंजीकरण करवा रखा है। बौंदकलां से सिर्फ 1758 किसानों ने ही कपास का पंजीकरण करवाया है।
मंडी में सुविधाओं के बारे में ये बोले किसान-
दोनों जगह वजन होता तो अच्छा होता
1. नई अनाज मंडी में फसल बेचने आए किसान जिले सिंह ने बताया कि मंडी में वजन करने के लिए दोनों गेट पर धर्मकांटा है लेकिन सिर्फ एक गेट पर फसल का वजन किया जा रहा है जिससे दूसरे गेट पर जाने के लिए लंबी दूरी तय करके जाना पड़ रहा है। दोनों धर्मकांटा पर मापतौल शुरू करना चाहिए।
-जिले सिंह, किसान।
शौचालय से आ रही दुर्गंध
2. मंडी में बाजरा की फसल लेकर पहुंचे किसान प्रविंद्र ने बताया कि शौचालय साफ नहीं हैं। दिनभर दुर्गंध बनी रहती है। शौच की सुविधा में दिक्कतें आ रही हैं। फसल खरीद के पहले दिन ही ये हाल है तो आगे जाने क्या होगा।
-प्रविंद्र, किसान।