चरखी दादरी। राजकीय स्कूलों में पहली व दूसरी कक्षा के छात्रों का स्कूल में ही होमवर्क करवाकर लॉकर में बैग रखने की योजना बीच में दम तोड़ गई। आलम ये है कि कई स्कूलों में तो अब लॉकर्स पहुंचे ही नहीं हैं, जबकि जिन स्कूलों में पहुंचे हैं वहां इन्हें प्रयोग नहीं किया जा रहा। ऐसे में दोनों कक्षाओं के विद्यार्थी घर से स्कूल तक और स्कूल से घर तक बैग का बोझ ढो रहे हैं। विभाग की योजना अनुसार प्रत्येक छात्र के लिए अलग से लॉकर की व्यवस्था करने का प्रावधान है।
शिक्षा विभाग व सरकार समय-समय पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने के प्रयास करती आ रही है ताकि विद्यार्थी के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास हो और वह व्यावसायिक रूप से कुशल बन सके। करीब तीन साल पहले मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से स्कूली में छात्रों के बैग का वजन कम करने संबंधी हिदायतें जारी की गई थी। छोटी कक्षाओं के छात्रों पर बस्ते के बढ़ते बोझ को देखते हुए मंत्रालय ने यह निर्णय लिया था। छात्रों पर बढ़ते तनाव को कम करने के लिए मंत्रालय की ओर से कई सुझाव दिए गए। बस्ते के बोझ को कम करने के अलावा पाठ्यक्रम को भी कम करने की दिशा में काम शुरू करने की बात कही गई।
करीब तीन साल पहले शिक्षा विभाग ने छात्रों का तनाव कम करने के लिए इस दिशा में प्लानिंग पर काम शुरू किया था। इसके तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं के छात्रों पर बढ़ते होमवर्क के दवाब को कम किया जाना है ताकि विद्यार्थी घर जाकर मानसिक रूप से स्वतंत्र रह सके। वह घर पर होमवर्क का दवाब महसूस न करने पाएं।
जिले में 12 हजार हैं पहली व दूसरी कक्षा के छात्र
जिले के राजकीय स्कूलों में पहली और दूसरी कक्षा की छात्र संख्या की बात करें तो 12 हजार हैं। विशेषकर इन दोनों कक्षाओं के लिए ही लॉकर्स योजना तैयार की गई थी। लंबा समय बीतने के बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारी जिले के सभी स्कूलों में यह सुविधा मुहैया नहीं करवा पाए हैं।
जिले में ये है स्कूलों की स्थिति
दादरी जिले में 365 राजकीय स्कूल हैं। इनमें 220 प्राइमरी, 48 मिडिल, 44 हाई स्कूल और 66 सीनियर सेकेंडरी कूल हैं। इनमें पहले से बारहवीं कक्षा तक छात्र संख्या करीब 40 हजार हैं। पिछले साल के मुकाबले इस साल राजकीय स्कूलों में छात्र संख्या घटी है।
अधिकारी बोले
यह योजना शुरू कर रखी है लेकिन लॉकर की सुविधा का फायदा छात्रों को नहीं मिल पा रहा है। लॉकर भी सीमित संख्या में ही हैं। इस पर गंभीरता से काम करवाया जाएगा। छात्रों को भी जागरूक किया जाएगा।
-रामचंद्र, बीईओ, शिक्षा विभाग