चरखी दादरी। सिंचाई विभाग ने चुनाव आयोग को पत्र भेजा है। इसमें मानसून सीजन से पहले जिले में सभी 16 ड्रेनों की सफाई करवाने की अनुमति मांगी गई है ताकि मानसून सीजन के दौरान पानी की निकासी का काम ठीक प्रकार से हो सके। जिले में हर साल मानसून सीजन में जलभराव की वजह से करीब 5,000 एकड़ जमीन में खरीफ की फसल खराब हो जाती है। इस कारण रबी की बिजाई का काम भी देरी से पूरा हो पाता है जिससे किसानोंं को हर साल लाखों की चपत लगती रही है।
जिले के गांव इमलोटा, अचीना, मोरवाला, सरूपगढ़, भागवी, कंहेटी, सातौर, लोहरवाड़ा, झिंझर, समसपुर, खातीवास, जयश्री, कमोद, मिसरी, रावलधी, चरखी, पैतावास, मानकावास, पांडवान, बिरही कलां, छपार, फतेहगढ़, साहुवास, बौंदकलां, रणकौली आदि गांवोंं में हर साल जलभराव की समस्या बनती है जिससे हर साल करोड़ोंं रुपये की सड़कें भी खराब हो जाती हैं। इस क्षेत्र में हर साल नई सड़कें बनानी पड़ती हैं। इन गांवों में बारिश होने पर किसान फसलों की बिजाई भी नहीं कर पाते जिससे उन पर दोहरी आर्थिक मार पड़ती है।
जिले के विभिन्न भागों से 16 ड्रेनें गुजरती हैं जिनके माध्यम से बारिश के पानी की निकासी कर नहरों में डाला जाता है। इन ड्रेनों की सफाई करने की जरूरत है। मानसून से पहले ड्रेनों को साफ करना जरूरी होता है ताकि पानी आपूर्ति में बाधा न होने पाए। गांव इमलोटा-दादरी ड्रेन और इमलोटा-कंहेटी ड्रेनें प्रमुख रूप से शामिल हैं। गांव इमलोटा स्थित दिल्ली रोड पर होटल के पास से ड्रेन गुजरती है। इसी प्रकार इमलोटा-कंहेटी नाम से भी ड्रेन है। ड्रेनों का पानी लोहारू व बधवाना आदि नहरों में डाला जाता है। क्षेत्र में मानसून का आगमन आमतौर पर जून अंतिम या जुलाई प्रथम सप्ताह तक माना जाता है। यह सीजन सितंबर अंत तक माना जाता है।
सभी ड्रेनों की सफाई करवाने के लिए चुनाव आयोग को अनुमति पत्र भेजा गया है। इसकी अनुमति मिलते ही सफाई का काम शुरू करवा दिया जाएगा। मानसून से पहले सभी ड्रेनों की सफाई करवाई जाएगी। - सतेंद्र कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।