संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। एक जुलाई से अदालतों में नए कानून लागू होने जा रहे हैं। इसके लिए विशेषज्ञों की ओर से जागरूकता सेमिनार लगाए जा रहे हैं, वहीं स्थानीय अधिवक्ता नए कानूनों का बारीकी से अध्ययन करने में जुटे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो अब छोटे और तीन साल से कम सजा के अपराधों में समरी ट्रायल से सेशन कोर्ट में ही 40 प्रतिशत मामले खत्म होने की उम्मीद है।
आईपीसी-सीआरपीसी की जगह अब भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम होंगे। देश में ये तीन नए कानून एक जुलाई से लागू होंगे। नए कानून में राजद्रोह को खत्म किया गया है। आतंकवाद को परिभाषित किया गया है। यौन अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। इन कानूनों का उद्देश्य लीगल सिस्टम को आज की जरूरतों के अनुरूप लाना और राष्ट्र की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है।अधिवक्ता मनोज जांगड़ा का कहना है कि भारतीय न्याय संहिता में 358 धाराएं हैं, जबकि आईपीसी में 511 धाराएं थीं। इसी तरह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में सीआरपीसी की 484 धाराओं की तुलना में 531 धाराएं हैं। नए कानून भारतीय साक्ष्य अधिनियम में 170 धाराएं हैं। अधिवक्ता पंकज ने बताया कि नए कानून में अब देश में कहीं भी जीरो एफआईआर दर्ज करवा सकेंगे। इसमें धाराएं भी जुड़ेंगी। अब तक जीरो एफआईआर में धाराएं नहीं जुड़ती थीं। 15 दिन के भीतर जीरो एफआईआर संबंधित थाने को भेजनी होगी। छोटे-छोटे मामलों और तीन साल से कम सजा के अपराधों के मामलों में समरी ट्रायल किया जाएगा। इससे सेशन कोर्ट में 40 प्रतिशत से ज्यादा मामले खत्म होने की उम्मीद है। पुलिस को 90 दिन में चार्जशीट दाखिल करनी होगी। परिस्थिति के आधार पर अदालत 90 दिन का समय और दे सकती है। अदालत को 60 दिन के भीतर आरोपी पर आरोप तय करने होंगे।
नए कानूनों के तहत अब 15 दिन के भीतर जीरो एफआईआर संबंधित थाने को भेजनी होगी। छोटे-छोटे मामलों और तीन साल से कम सजा के अपराधों के मामलों में समरी ट्रायल किया जाएगा। इससे सेशन कोर्ट में 40 प्रतिशत से ज्यादा मामले खत्म होने की उम्मीद है। अधिवक्ता नए कानूनों का अध्ययन करने में जुटे हैं।
नसीब राणा, प्रधान, चरखी दादरी बार एसोसिएशन