गांव बिलावल में आर्यवीर दल ओर से आयोजित व्यायाम प्रशिक्षण एवं चरित्र निर्माण संस्कार शिविर में
झोझूकलां। आर्यवीर दल ओर से गांव बिलावल में व्यायाम प्रशिक्षण एवं चरित्र निर्माण संस्कार शिविर आयोजित किया जा रहा है। इसके तीसरे दिन व्यायाम शिक्षक नारायण आर्य एवं योग सहायक योगेश सांगवान ने विद्यार्थियों को नियुद्धम एवं आत्मरक्षा संबंधी गतिविधियों का अभ्यास करवाया।
स्वामी सच्चिदानंद ने संकल्प को सफलता की जननी बताया। उन्होंने कहा कि बुद्धि, विचार और दृढ़-भावना से परिष्कृत होने के बाद इच्छाएं संकल्प बन जाती हैं। उद्देश्य पूर्ति के लिए इच्छा की अपेक्षा संकल्प अधिक प्रबल है। संकल्प वह इच्छाशक्ति है जो भयंकर व्यवधान और विकट परिस्थितियों के बीच भी सफलता की मंजिल तक पहुंचा देती है।
अनेक संकल्प-विकल्प इस सूक्ष्म जगत में विद्यमान हैं और उनका लाभ मनुष्य को तभी मिल पाता है जब पूर्ण मनोयोगपूर्वक एक उद्देश्य की पूर्ति के लिए व्यक्ति प्रवृत्त होता है।
उन्होंने कहा कि संकल्प के अभाव में शक्ति का कोई महत्व और मूल्य नहीं होता। यह भी सत्य है कि शक्ति के अभाव में संकल्प भी पूर्ण नहीं होते। संकल्प के साथ शक्ति को मिलना एक कला है। केवल वे ही इच्छाएं पूर्ण होती हैं जो सशक्त प्रयासों से भी परिपूर्ण हों।
दृढ़ निश्चयी और उद्देश्य निष्ठ व्यक्ति जीवन की विषम परिस्थितियों के बीच भी अपना मार्ग खोज लेते हैं। साधन का अभाव या प्रतिकूल परिस्थितियां उन्हें रोक नहीं सकतीं। इस अवसर पर प्रधानाध्यापक प्रेम सिंह, अध्यापक प्रदीप कुमार, मनोज कुमार, नरेश कुमार, रविंद्र, मांगेराम, धर्मेंद्र, दीपिका, रेखा, सुनीता आदि मौजूद रहीं।