चरखी दादरी। मजदूर दिवस पर एसकेएस कार्यालय में मजदूर, किसान, कर्मचारियों संगठनों व सीआईटीयू की बैठक आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता कमलेश भैरवी ने की। उन्होंने केंद्र सरकार से चार नए लेबर कानून वापस लेने की मांग की।
कमलेश ने कहा कि 18वीं सदी में औद्योगिक क्रांति के समय में कई देशों में कारखाने स्थापित हुए। इनमें काम करने वाले लाखों मजूदरों को रोजाना 18 से 20 घंटे काम करने पर भी नाममात्र का वेतन व सुविधाएं मिलती थीं। उनके साथ अन्याय होता था, ऐसे समय में कार्ल मार्क्स ने नारा दिया कि दुनिया के मजदूर संगठित होकर आंदोलन करें, उनके आह्वान पर अमेरिका के शिकागो शहर में लाखों मजदूरों ने एकता दिखाते हुए प्रदर्शन किया। पुलिस ने उन पर गोलियां दागीं, जिसके चलते 13 मजदूर मारे गए व हजारों घायल हुए।
उन्होंने कहा कि अनेक देशों में मजदूर सड़कों पर उतर आए। इसके चलते मजदूरों के लिए कार्य अवधि प्रतिदिन आठ घंटे निश्चित की गई।
कमलेश ने बताया कि केंद्र सरकार ने चार नए लेबर कानून बनाए जो बिल्कुल गलत हैं। पुराने मजदूर कानून लागू होने चाहिए। प्रयोजना कर्मी को सरकारी कर्मी का दर्जा मिले, न्यूनतम वेतन 26 हजार किया जाए, खाली पदों पर स्थायी भर्ती हो, कच्चे कर्मियों को पक्का किया जाए।
इस दौरान किसान सभा जिला प्रधान रणधीर कुंगड़, ओमप्रकाश नंबरदार, दलबीर सिंह रासीवास, सुरेंद्र मोठसरा, यशपाल पैंतावास, रिटायर्ड कर्मी संगठन जिला प्रधान राजकुमार, सचिव मनोज कुमार, देवेंद्र भागवी, दिलबाग सिंह, कर्णवीर आदि मौजूद रहे।