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चरखी दादरी: नंदीशाला में बढ़ते रहे गोवंश, घटती गई कर्मचारियों की संख्या

Thu, 16 Feb 2023 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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नंदीशाला में बैठे गोवंश।
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चरखी दादरी। शहर को पशुमक्त बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने 2017 में नंदीशाला शुरू की थी। उस दौरान यहां नगर परिषद और मार्केटिंग बोर्ड की ओर से चारा की व्यवस्था की गई थी। इतना ही नहीं यहां 10 कर्मचारी भी तैनात थे। समय के साथ नंदीशाला में गोवंश की संख्या तो बढ़ती गई, लेकिन यहां कर्मचारियों की तैनाती कम होते चली गई। अब आलम यह है कि 282 गोवंश के लिए महज दो ही कर्मचारी नियुक्त है। इतना ही नहीं गोवंशों के चारा का जुगाड़ सामाजिक संस्थाएं अपने स्तर पर कर रही हैं जबकि सरकार से उन्हें मदद की उम्मीद है।
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सरकार गोवंशों के लिए आर्थिक सहायता देने का चाहे कितना ही दम भरती हो, लेकिन दादरी शहर की नंदीशाला में स्थिति बिल्कुल उलट है। नंदीशाला निर्माण के 6 साल बाद भी चारे के नाम पर आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई है। बता दें कि वर्ष 2017 में शहर में बढ़ते गोवंश के हमले से निजात दिलवाने के लिए तत्कालीन उपायुक्त विजय सिद्दपा ने नगर परिषद को बाजार में घूमने वाले गोवंशों को पकड़कर इन्हें नंदीशाला में रोकने का आदेश दिया था।
उनके आदेश के बाद अग्रसेन धर्मशाला के सामने स्थित पुराने मार्केट कमेटी की जगह में नगर परिषद ने नंदीशाला का निर्माण करवाया था। उस समय नंदीशाला में शहर में घूम रहे 140 गोवंशों को रोका गया था। उस समय उपायुक्त के आदेश के चलते नंदीशाला में नगर परिषद ने गोवंशों की देखभाल के लिए 10 कर्मचारी भी लगाए थे। वहीं, पशु चिकित्सक भी हर रोज इन गोवंशों की देखभाल व दवा देने के लिए पहुंचते थे। अब लंबे समय से नंदीशाला की व्यवस्थाएं सामाजिक संगठन ही निभा रहे हैं।
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- 2020 में बनाई गई समिति
वर्ष 2020 में नंदीशाला आहार समिति नाम से संस्था की स्थापना की गई। संस्था के सदस्य समाजसेवी लोगों से चंदा लेकर नंदीशाला में रखे गए गोवंश के चारे का इंतजाम कर रहे हैं। संस्था के प्रधान महाबीर सिंह ने बताया कि नंदीशाला में पशु चारे के नाम पर सरकार की तरफ से कोई भी आर्थिक सहायता नहीं दी गई है। वहीं, नंदीशाला में सफाई कर्मचारियों की भी कमी बनी हुई है।
- अपने स्तर पर ही करवाते हैं उपचार
संस्था प्रधान महाबीर सिंह ने बताया कि बीमार पशुओं को दवा देने के लिए भी कोई सरकारी चिकित्सक नहीं आता। वो अपने स्तर पर ही पशुओं की दवा का प्रबंध करते हैं। उन्होंने बताया कि नंदीशाला में संस्था ने ही वेतन पर दो कर्मचारी लगाए हैं जबकि दो लाख रुपये खर्च कर ट्रैक्टर व कल्टीवेटर की व्यवस्था की है।
- ये हैं संस्था सदस्य
संस्था में पूर्व पार्षद रविंद्र गुप्ता, रिंपी फौगाट, संदीप सिंगल, बजरंग बंसल, अनिल बंसल, शिवम मित्तल व सतीश राणा समेत कई समाजसेवक शामिल हैं। उन्होंने सरकार से नंदीशाला में चारे का प्रबंध और कर्मचारियों की नियुक्ति करवाने की मांग की है।
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