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Charkhi Dadri News: स्वास्थ्य केंद्रों पर ओपीडी पर्ची के लिए कैश होगा बंद, ऑन लाइन करना होगा भुगतान

Wed, 14 Oct 2026 11:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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 श्हर के नागरिक अस्पताल स्थित ओपीडी काउंटर पर पर्ची कटवाते मरीज।  - फोटो : 1
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चरखी दादरी। जिले के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में अब पांच रुपये की ओपीडी पर्ची बनवाने के लिए भी मरीजों को डिजिटल भुगतान करना होगा। यह व्यवस्था अगले सप्ताह से लागू होने की संभावना है। मुख्यालय के नए आदेशों के अनुसार पर्ची शुल्क नकद लेने के बजाय यूपीआई स्कैनर से भुगतान करना होगा।
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इस फैसले से सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को हो सकती है जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है जो कीपैड मोबाइल इस्तेमाल करते हैं या जिन्हें ऑनलाइन भुगतान की जानकारी नहीं है। जेब में पांच रुपये होने के बावजूद ऐसे मरीजों को पर्ची बनवाने के लिए दूसरों की मदद लेनी पड़ सकती है।
मुख्यालय से मिले नए आदेश के बाद जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को ओपीडी पर्ची कटवाने के लिए पांच रुपये की ऑनलाइन पेमेंट करनी होगी। फिलहाल जिले में नागरिक अस्पताल, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र (एमसीएच), तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में नकद भुगतान का विकल्प खत्म होने से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के सामने व्यावहारिक दिक्कत खड़ी हो सकती है। सवाल यह है कि जिन लोगों के पास डिजिटल भुगतान की सुविधा नहीं है वे पर्ची कैसे बनवाएंगे। शहर के स्वास्थ्य केंद्रों पर पिछले सप्ताह 4 से 13 अक्तूबर तक साढ़े छह हजार के करीब मरीज जांच के लिए पहुंचे थे। लेकिन अब अगले सप्ताह से नए नियमों के तहत ओपीडी पर्ची कटवाने के लिए अधिकतर बुजुर्गों व ऑनलाइन भुगतान की जानकारी नहीं रखने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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एक सप्ताह में 6459 मरीजों ने करवाई जांच जिले में एक सप्ताह के दौरान 1451 नए मरीजों ने पंजीकरण करवाया जबकि 5008 पुराने मरीज जांच और उपचार के लिए पहुंचे। इस तरह कुल 6459 मरीजों ने स्वास्थ्य सेवाएं लीं। मरीजों की इस संख्या को देखते हुए पर्ची भुगतान की प्रक्रिया का सुचारु होना जरूरी है। यदि डिजिटल भुगतान नहीं कर पाने वाले मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई तो उन्हें पर्ची काउंटर पर परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
भुगतान के लिए तलाशना पड़ेगा मददगार नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ सकता है जो इलाज के लिए नकद रुपये लेकर अस्पताल पहुंचते हैं। कीपैड फोन रखने वाले बुजुर्ग, डिजिटल लेनदेन से अनजान ग्रामीण और मोबाइल फोन नहीं रखने वाले मरीज यूपीआई भुगतान खुद नहीं कर पाएंगे। ऐसे में उन्हें किसी दूसरे मरीज, परिजन या आसपास मौजूद व्यक्ति से भुगतान करवाने की मदद मांगनी पड़ सकती है। बीमारी के दौरान उपचार के लिए पहुंचे मरीजों को महज पांच रुपये की पर्ची के लिए दूसरों पर निर्भर होना पड़े तो यह व्यवस्था की व्यावहारिकता पर सवाल खड़े करता है। खासकर अकेले अस्पताल पहुंचने वाले बुजुर्गों के लिए भुगतान का इंतजाम करना अतिरिक्त परेशानी बन सकता है। नकद भुगतान का विकल्प नहीं तो समाधान क्या लोगों का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना अपनी जगह है लेकिन इसकी अनिवार्यता के साथ उन लोगों की जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता जिनके पास यूपीआई की सुविधा नहीं है।
स्वास्थ्य केंद्रों में नकद भुगतान स्वीकार नहीं होने की स्थिति में ऐसे मरीजों के लिए अधिकृत सहायता काउंटर या कोई अन्य वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती यह है कि डिजिटल भुगतान लागू करने के बावजूद किसी मरीज को केवल स्मार्टफोन या यूपीआई की सुविधा नहीं होने के कारण पर्ची बनवाने में दिक्कत न हो। पांच रुपये का शुल्क छोटा हो सकता है लेकिन भुगतान का विकल्प सीमित होने से जरूरतमंद मरीजों के लिए यह भी उपचार की राह में बाधा बन सकता है।
वर्सन:
मुख्यालय से मिले आदेश अनुसार अगले सप्ताह से सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपचार के लिए आने वाले मरीजों को ऑनलाइन भुगतान करना के निर्देश हैं। पत्र अनुसार अगले सप्ताह से नए नियम लागू कर सभी ओपीडी काउंटरों पर स्कैनर लगवाने का कार्य करवाया जाएगा। -डॉ. बिजेंद्र सिंह लडवाल, प्रवक्ता नागरिक अस्पताल।
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