चरखी दादरी। शहर के एमसीएच (मातृ शिशु अस्पताल) में वाटर कूलर बंद होने से मरीजों को पेयजल के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। लगातार बढ़ते तापमान में मरीजों और तीमारदारों को पीने के लिए महंगे दामों पर ठंडा पानी खरीदना पड़ रहा है। मरीजों ने अस्पताल प्रशासन से खराब पड़े वाटर कूलरों को ठीक करवाने की मांग की है।
मातृ शिशु अस्पताल में मरीजों और तीमारदारों के लिए दोनों मंजिलों पर वाटर कूलर लगाए गए हैं, लेकिन पिछले दो माह से वाटर कूलर बंद पड़े हैं। लगातार गर्मी का प्रकोप बढ़ने के साथ ही पीने के पानी की मांग भी बढ़ने लगी है। अस्पताल में ठंडे पानी का अभाव होने के कारण उपचार कराने आए मरीज और तीमारदार बाजार से पानी खरीदने के लिए मजबूर हैं।
वाटर कूलरों की सफाई नहीं होने से गंदगी फैली हुई है। अस्पताल में आए मरीज संजय डाबरा, प्रदीप सैनी, राजेश कुमार, राजीव कुमार, हरेंद्र गोठवाल ने बताया कि पूरे अस्पताल परिसर में पीने के लिए ठंडा पानी नहीं है। वाटर कूलरों से गर्म पानी आ रहा है, कुछ मरीज वाटर कूलर के पानी से खाने के बर्तन साफ कर रहे हैं। इससे बर्तनों में लगा खाना कूलर के पास पड़ा रहता है और प्यास बुझाने के लिए मरीज बाहर से पानी की बोतल खरीदकर ला रहे हैं। मरीजों ने अस्पताल प्रशासन से पीने के लिए पानी की उचित व्यवस्था करवाने की मांग की है।
उपचार के लिए प्रतिदिन आते हैं 400 मरीज
शहर के बीच में बने मातृ शिशु अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए डिलिवरी सुविधा के साथ महिला रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति के बाद मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। कर्मचारियों का मानना है कि अस्पताल में फिलहाल प्रतिदिन 400 से अधिक ओपीडी हो रही हैं।
दोनों मंजिलों में नहीं है पेयजल की सुविधा
अस्पताल में ग्राउंड फ्लाेर में सामान्य ओपीडी और खून जांच के लिए लैब बनाई गई है, बीमार मरीजों को भी इसी जगह भर्ती किया जाता हैं। वहीं पहली मंजिल पर लेबर रूम के साथ नवजात बच्चों के लिए एसएनसीयू बनाया गया है, लेकिन यहां भी वाटर कूलर बंद पड़ा है। भवन की दूसरी मंजिल पर डेंगू, मलेरिया जांच लैब के अलावा जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र कार्यालय है। इसके अलावा डायलिसिस के मरीजों का उपचार भी यहीं किया जाता है और पीने के लिए पानी की यहां भी कोई व्यवस्था नहीं है।
मातृ शिशु अस्पताल में वाटर कूलर बंद होने की हमारे पास कोई सूचना नहीं है। अगर वहां वाटर कूलर बंद हैं तो जल्द ही सभी को ठीक करवा दिया जाएगा। -डॉ. राहुल, प्रवक्ता नागरिक अस्पताल, चरखी दादरी।