घिकाड़ा जलघर से जोड़े जाएंगे दोनों नए बूस्टिंग स्टेशन
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। विभाग शहर में लो प्रेशर की समस्या दूर करने के लिए बूस्टिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाएगा। ताकि, कॉलोनियों में पानी का दबाव बने और अंतिम छोेर तक पानी पहुंच सके। इस प्रोजेक्ट पर विभाग ने काम शुरू कर दिया है।
शहर में इस समय सात बूस्टिंग स्टेशन हैं। अब यह संख्या नौ हो जाएगी। एक बूस्टिंग स्टेशन नगर के लोहारू रोड पर दमकल कार्यालय के पास बनेगा। दूसरा मेजबान चौक के पास बनना है। दमकल कार्यालय के पास बूस्टिंग का काम शुरू हो चुका है।
नए बूस्टिंग स्टेशन बनने से अन्य का लोड कम हो जाएगा। हीरा चौक क्षेत्र में सबसे पुराना बूस्टिंग है। इससे पुराने शहर के क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति की जाती है। इसी प्रकार शहर के रोज गार्डन के पास बने बूस्टिंग स्टेशन से बस स्टैंड रोड, एमसी कॉलोनी व कुछ लोहारू रोड क्षेत्र में पानी की आपूर्ति की जाती है। इसी प्रकार, दिल्ली बाईपास पर बने बूस्टिंग से गांधीनगर व प्रेमनगर कॉलोनी में आपूर्ति होती है।
चंपापुरी बूस्टिंग स्टेशन से रोहतक रोड क्षेत्र की आबादी में आपूर्ति होती है। सिविल अस्पताल परिसर में बने बूस्टिंग स्टेशन से लोहारू रोड व महेंद्रगढ़ रोड पर बस्तियों में आपूर्ति की जाती है। इस प्रकार इन बूस्टिंग स्टेशन से पूरे शहर को कवर किया जाता है।
अब दो नए बूस्टिंग स्टेशन लोहारू रोड दमकल कार्यालय और मेजबान चौक के पास बनने हैं। इनसे लोहारू रोड क्षेत्र व नई बस्तियों में पेयजल आपूर्ति की जानी है। इसके लिए अलग से नई पेयजल लाइनें बिछाई जाएंगी। इनको सीधे घिकाड़ा जलघर से जोड़ने की योजना है। ताकि, बीच में मेन लाइन में अवैध रूप से कनेक्शन न होने पाए और पानी की बर्बादी न हो।
नए बूस्टिंग स्टेशन से शहर में पानी के लो प्रेशर की समस्या खत्म होगी। पेयजल आपूर्ति में सुधार आएगा। लोहारू रोड क्षेत्र काफी विस्तृत होने की वजह से समान रूप से पानी का वितरण नहीं हो पा रहा है। इससे पेयजल का संकट बना रहता है। आबादी बढ़ने पर नए बूस्टिंग स्टेशन बनाने जरूरी हैं। हर साल शहर में करीब 500 की संख्या में नए मकान बन रहे हैं। इनमें पेयजल कनेक्शन भी बढ़ रहे हैं। इससे पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाता है। वैसे भी विभाग की योजना है कि जलघरों से सभी बूस्टिंग स्टेशन तक सीधे लाइन बिछाई जाए। ताकि, लोग मुख्य लाइनों में कनेक्शन न कर पाएं।
इस समय बूस्टिंग की मुख्य लाइनों में लोग पेयजल कनेक्शन कर रखे हैं, जिससे बूस्टिंग भरने में दिक्कतें आ रही हैं। ज्यादा समय लगता है। विभाग रात के समय बूस्टिंग में पानी डालता है। सुबह साढ़े चार बजे बूस्टिंग से कॉलोनियों में आपूर्ति शुरू कर देता है।
शहर का दायरा बढ़ने की वजह से नए बूस्टिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इससे पेयजल आपूर्ति में सुधार आएगा। प्रेशर भी बढ़ जाएगा। इससे दूसरे बूस्टिंग स्टेशनों का लोड कम हो जाएगा।
-कनिष्ठ अभियंता धीरेंद्र सांगवान, जनस्वास्थ्य विभाग
फोटो 01
बूस्टिंग स्टेशन या जलघर टैंक। संवाद