जीते गए पदक दिखाते हुए श्रीभगवान सिंह। स्रोत : स्वयं
चरखी दादरी। दिल तो बच्चा है जी... ये वाक्या आपने जरूर सुना होगा। लोहरवाड़ा निवासी 56 वर्षीय श्रीभगवान के दिल पर इस वाक्या ने ऐसी छाप छोड़ी की उनमें मन में दोबारा बचपन जीने की कसक जाग उठी। उन्होंने खेल मैदान के जरिये इसको पूरा करने की ठानी। दस माह के छोटे से कॅरिअर में वे छह पदक जीत चुके हैं। इनमें दो स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक शामिल हैं। अब तक वे आठ मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सहभागिता निभा चुके हैं।
राष्ट्रीय एथलीट श्रीभगवान सिंह ने बताया कि दस माह पहले अगस्त 2023 में उन्होंने खेल की शुरुआत की थी। इससे पहले वह खेती करते और घर ही रहते थे। एक दिन वे अंतरराष्ट्रीय मैराथन धावक रामफल फौगाट मिले। दोनों के बीच बागवानी को लेकर बातचीत हुई। इसके बाद रामफल ने उन्हें खेल के लिए प्रेरित किया।
धावक श्रीभगवान सिंह ने बताया कि दिसंबर 2023 में उन्होंने गुरुग्राम में एक प्रतियोगिता में भाग लिया और वे दौड़ में सबसे अंतिम रहे। इसके बाद वे अभ्यास करते रहे। इस दौरान उन्होंने अलवर में आयोजित मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अपना भाग्य आजमाया। जनवरी 2024 में आयोजित स्पर्धा में उन्होंने पांच और 15 किलोमीटर दौड़ में भाग लेकर राष्ट्रीय स्तर पर दो स्वर्ण पदक हासिल किए। इसके बाद उन्होंने दो मैराथन में भी भाग लिया, लेकिन पदक नहीं जीत सके। उन्होंने बताया कि जून में गाजियाबाद में आयोजित राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में चार स्पर्धाओं में भाग लेते हुए दो रजत व दो कांस्य पदक जीते।
सुबह साढ़े तीन बजे उठकर लगाते हैं दौड़
श्रीभगवान सिंह ने बताया कि वे प्रतिदिन सुबह साढ़े तीन बजे उठकर दौड़ लगाते हैं। दो दिन दस किलोमीटर और दो दिन पांच किलोमीटर दौड़ लगाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। घर का बना खाना और दूध, दही व घी उनकी सेहत का राज है। श्रीभगवान ने बताया कि उनका लक्ष्य 21 जुलाई को दिल्ली में होने वाली मैराथन में स्वर्ण पदक जीतना है।
रामफल फौगाट भी जीत चुके पदक 38 पदक
कमोद निवासी रामफल फौगाट अंतरराष्ट्रीय मैराथन धावक हैं। वे अब तक पांच अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं। उन्होंने राज्य स्तर पर पदक हासिल किए हैं। दस साल में वे 38 पदक जीत चुके हैं। अब वे फिलहाल रोहतक में रहकर तैयारी कर रहे हैं और अपने साथ अन्य बुजुर्ग व्यक्तियों को खेल के लिए प्रेरित कर रहे हैं।