फाउंडेशन के एमआरएफ सेंटर पर एकत्र कचरा।
चरखी दादरी। मन में कुछ करने की चाहत हो तो विकट परिस्थितियां भी आड़े नहीं आती। हिमाचल-प्रदेश में कचरा निस्तारण के क्षेत्र में काम करने वाले झोझूकलां निवासी प्रदीप सांगवान इसकी बानगी हैं। प्रदीप ने विकट परिस्थितियों से गुजरते हुए पर्यावरण हित के लिए जो काम किया, उसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुरीद हो गए। उन्होंने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में प्रदीप सांगवान से दस मिनट तक फोन पर बात की।
प्रदीप सांगवान ने बताया कि 2016 में उन्होंने पहाड़ों से कचरा एकत्र करने की मुहिम शुरू की। शुरुआत में इस मुहिम से लोगों को जोड़ने में काफी दिक्कतें आई। इतना ही नहीं आर्थिक संकट भी रहा। इसके बावजूद कुछ साथियों के सहयोग से मुहिम जारी रखी। प्रदीप के अनुसार 2020 तक हिलिंग हिमालय फाउंडेशन टीम ने काफी कचरा एकत्र कर लिया। इसके बाद एमआरएफ (मेटिरियल रिकवरी फेस्लिटी) सेंटर लगाने की कवायद शुरू की गई। इसके लिए दोस्तों से मदद मांगी जबकि प्रदीप को अपनी बोलेरो तक बेचनी पड़ गई।
प्रदीप सांगवान ने बताया कि उनकी फाउंडेशन हिमाचल-प्रदेश के किन्नौर में दो, नारकंडा, ताबो, मंसारी में एक-एक मेटिरियल रिकवरी फेस्लिटी (एमआरआफ) सेंटर स्थापित कर चुकी है। हिमाचल-प्रदेश में छठां एमआरएफ सेंटर कसोल में शुरू करने की योजना है। प्रदीप ने बताया कि इन पांचों एमआरएफ सेंटर से हिमाचल-प्रदेश के 15 गांव जुड़े हैं। इन गांवों से एमआरएफ सेंटर पर अब जो कचरा पहुंचता है और 100 प्रतिशत पृथक होता है जिससे उसके निस्तारण में काफी आसानी होती है।
- जुलाई से वर्किंग में हैं सभी एमआरएफ सेंटर
प्रदीप सांगवान ने बताया कि हिमाचल-प्रदेश में स्थापित किए गए एमआरएफ सेंटर गत जुलाई से वर्किंग में हैं। यहां प्रतिदिन साढ़े 4 टन कचरा निस्तारित होता है। पिछले करीब 9 माह में फाउंडेशन 1400 टन कचरे का निस्तारण करवा चुकी है, जो अपने आप में बड़ी बात है।
- झोझूकलां में भी संगठन करेगा मुहिम शुरू
प्रदीप सांगवान ने बताया कि अपने पैतृक गांव झोझूकलां में भी उनकी एमआरएफ सेंटर बनाने की योजना है। इसके तहत घरों से डोर-टू-कचरा उठाने के लिए वाहन खरीदे जा चुके हैं। फिलहाल एमआरएफ सेंटर के लिए जगह चयन की कोशिश जारी है। फाउंडेशन का प्रयास है कि झोझूकलां में 12 गांवों का कलस्टर बनाकर एमआरएफ सेंटर अगस्त तक शुरू कर दिया जाए।