चरखी दादरी। जिन भागों में मानसून के बाद खेतों से अब पानी की नमी सूखी है, वहां किसान गेहूं की पछेती किस्मों का चयन करें। पिछले कुछ दिनों से पश्चिमी हवाएं चलने व मौसम साफ होने एवं दिनभर धूप खिलने से जलभराव वाले खेतों से पानी सूख गया है। अब किसानों को इस क्षेत्र में बिजाई होने की उम्मीद जगी है। किसान यहां गेहूं की पछेती फसलों की बिजाई कर सकेंगे।
बीते मानसून सीजन में करीब दो हजार एकड़ जमीन में जलभराव हुआ था और अब खेतों का पानी सूख गया है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो पश्चिमी हवा फसलों में वृद्धि एवं विकास के लिए भी बेहद गुणकारी मानी जा रही है। यह फसलों के लिए निरोगी होती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस साफ मौसम में कीट आदि की शिकायत भी फसलों में कम होती है।
दरअसल पांच सितंबर को 73 व 13 सितंबर को हुई 74 एमएम बारिश से जिला के कई गांवों में खेतों में जलभराव होने से खरीफ की फसलों में काफी नुकसान हो गया था। गांव भागवी, इमलोटा, सरूपगढ़, सातौर, साहुवास, फतेहगढ़, रावलधी, मिसरी, बौंद कलां, जयश्री, झींझर आदि गांवों में खड़ी फसलों में ज्यादा मात्रा में जलभराव होने से काफी नुकसान हुआ था। बाजरा, कपास की फसलें पानी से खराब हो गई थी। इन क्षेत्रों में पानी की निकासी का काम पूरा हो चुका है अब पश्चिमी हवाएं चलने व दिन में धूप खिलने की वजह से नमी भी सूख गई है अब यहां किसान 25 दिसंबर तक गेहूं की पछेती बिजाई कर सकेंगे। किसान यहां पछेती किस्मों का ही इस्तेमाल करें। वहीं, बल्लू फोगाट व मोनू फोगाट ने बताया कि पश्चिमी हवाएं चलने से दिल्ली रोड सीवर प्लांट के आसपास कई एकड़ में पानी भरा था अब सूखने पर किसान गेहूं की बिजाई कर रहे हैं।
पश्चिमी हवा चलने पर पौधा हो जाता है गहरा हरा
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि पश्चिमी हवा से पानी जल्दी सूखने लगता है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि पश्चिमी हवाएं चलने से फसलों में छोटे-मोटे रोग स्वत: ही खत्म हो जाते हैं। इस हवा के चलने से फसली पौधा तेज गति से विकास एवं वृद्धि करता है। पौधा पीलापन के बजाय डार्क ग्रीन रंग का हो जाता है।
पश्चिमी हवाएं चलने से अब नमी सूखने पर किसान जलभराव वाले भागों में गेहूं की 25 दिसंबर तक बिजाई कर सकते हैं। अभी गेहूं की पछेती किस्मों की बिजाई का समय बचा है। कृष्ण कुमार, एसडीओ, कृषि विभाग।