फोटो 35 : दादरी जिले में छाया स्माॅग। संवाद
फोटो 36 : दादरी के रोहतक रोड पर निर्माणाधीन आरओबी के लिए उखाड़ी गई सड़क के बाद पड़ी मिट्टी से गुजरते वाहन और उठती धूल। संवाद
फोटो 37 : दादरी से बाढड़ा रोड पर भारी वाहन गुजरने के दौरान उड़ती धूल। संवाद
वीरवार को एक्यूआई पहुंचा 392 पर, आंखों, सीने में जलन की समस्याएं बढ़ीं
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। दादरी की हवा एक बार फिर काफी प्रदूषित हो गई है। वीरवार को जिले में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 392 तक जा पहुंचा है। यह बेहद खराब श्रेणी में है। इस स्तर में सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, गले में खराश और सीने में जलन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगी हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर हालात यूं ही रहे तो आने वाले दिनों में हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच सकती है। बावजूद इसके इससे निपटने के प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के दावे केवल फाइलों तक सीमित हैं। दूर से शहर पर स्मॉग की चादर नजर आती है।
जिले की विभिन्न सड़कों पर धूल के गुबार उड़ रहे हैं। ग्रैप-दो के तहत सड़क पर पानी का छिड़काव, कूड़ा जलाने पर रोक और निर्माण स्थलों की नियमित निगरानी के आदेश हैं, लेकिन दादरी में इन नियमों की अवहेलना हो रही है। शहर में सड़कों की सफाई स्वीपिंग मशीन के बजाय झाडू से हो रही है। वहीं, जिन स्थानों पर धूल उड़ती है, वहां भी पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। इससे हवा में महीन धूलकण और पीएम 2.5 की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है।
दादरी व साथ लगते महेंद्रगढ़ जिले में क्रशर जोन होने के कारण यहां से हर रोज हजारों की संख्या में भारी वाहनों का आवागमन होता है। इनमें से अधिकतर वाहनों में निर्माण सामग्री भरी होती है। नियमों की अवहेलना करते हुए इन वाहनों में निर्माण सामग्री को कपड़े से ढका भी नहीं जा रहा है। वहीं, क्रशर जोन में कच्चे रास्तों के कारण भी काफी धूल उड़ती है।
स्मॉग ने ढका शहर, सूरज की किरणें भी धुंधली
सुबह के समय शहर के ऊपर धुएं जैसी परत छाई रहती है। सूरज की रोशनी स्मॉग के पार आने में लगभग नाकाम रहती है। लोग सुबह टहलने या साइक्लिंग करने के बजाय घरों में बंद रहने के लिए मजबूर हैं। चिकित्सकों का कहना है कि यह स्मॉग है यानी धुएं और फॉग का खतरनाक मिश्रण। इससे बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों के लिए हालात और बिगड़ सकते हैं।
अस्पतालों में बढ़े मरीज
दादरी के नागरिक अस्पताल व निजी अस्पतालों में इन दिनों सांस की तकलीफ, आंखों में जलन और गले में खराश के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सिविल अस्पताल में सांसों के मरीजों की संख्या दो से तीन गुना बढ़ गई है। पिछले एक सप्ताह में ऐसे मरीजों की संख्या में करीब 200 की बढ़ोतरी हुई है। यह प्रदूषण का सीधा असर है। चिकित्सक लोगों को सलाह दे रहे हैं कि मास्क लगाकर बाहर निकलें और सुबह-शाम बाहर व्यायाम करने से बचें।
तापमान गिरने के साथ बढ़ रहा प्रदूषण : डॉ. चंद्रमोहन
राजकीय महाविद्यालय नारनौल के पर्यावरण क्लब के नोडल अधिकारी डॉ. चंद्रमोहन वर्मा ने बताया कि दीपावली के बाद से प्रदूषण निरंतर बढ़ रहा है। इसका सीधा संबंध मौसम के साथ है। सर्दी के मौसम की शुरुआत हो चुकी है। पारा पिछले 3-4 दिन में तेजी से नीचे गिरा है। तापमान में ठंड होने के कारण हवा में मौजूद जलवाष्प संघनित हो जाते हैं। हवा का बहाव भी कम हो जाता है। इसके कारण प्रदूषण के कण ज्यादा दूर तक नहीं जा पाते है। वे वातावरण में इकट्ठा होकर प्रदूषण का रूप धारण कर लेते हैं।