दिवाली ज्यों ज्यों नजदीक आ रही है जिले में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। इस पर जिले में पराली बेहद कम जली है और इसके बाद भी प्रदूषण का अधिकतम स्तर 500 पार पहुंच चुका है। सोमवार की अगर बात करें तो जिले में औसतन एक्यूआई 440 रहा जबकि प्रदूषण की अधिकतम मात्रा पांच सौ एक्यूआई तक भी पहुंची। प्रदूषण के चलते गंभीर बने हालातों को देखते हुए जिला उपायुक्त ने 100 इकाइयों को नोटिस जारी करने के आदेश दे दिए है। इसके अलावा इस दिवाली पर जिले में पटाखे बेचने और बजाने पर भी प्रतिबंध रहेगा।
जिले में प्रदूषण का स्तर बढ़ने का सबसे मुख्य कारण क्रशरों को माना जा रहा है। जिले में 300 से अधिक क्रशर हैं जिनसे प्रतिदिन हजारों टन निर्माण सामग्री देश के कई महानगरों में भेजी जाती है। इस समय प्रदूषण का स्तर चरम पर है। रविवार को जिले में प्रदूषण का अधिकतम स्तर 517 पहुंचा था जबकि सोमवार को भी हालात इसी तरह के बने रहे।
सोमवार को पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर 500 एक्यूआई और औसतन 440 एक्यूआई दर्ज किया गया। पीएम 10 का अधिकतम स्तर 500 और औसतन 419 एक्यूआई रहा। हवा में कार्बन की अधिकतम मात्रा 128 तक जा पहुंची। प्रदूषण को लेकर चिंताजनक बने हालातों पर उपायुक्त राजेश जोगपाल ने संज्ञान लिया है। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड को नियमों को ताक पर रखकर इकाइयां चलाने वालों पर तुरंत प्रभाव से कार्रवाई के आदेश दे दिए है।
क्रशर और फैक्टरियां हैं राडार पर
सूत्रों के अनुसार कई क्रशर और फैक्टरियां ऐसी हैं जिनमें नियमों को ताक पर रखकर काम हो रहा है। डीसी के आदेशों पर प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड ने इनका ब्योरा तैयार कर लिया है। जल्द ही इनके खिलाफ अगली कार्रवाई अमल में लाई जाएगी और विभाग अपनी रिपोर्ट तैयार कर उपायुक्त कार्यालय में भेजेगा।
- 15 नवंबर तक आतिशबाजी पर प्रतिबंध
दिवाली पर आतिशबाजी के चलते वाले होने वाले प्रदूषण को देखते हुए डीसी राजेश जोगपाल ने प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से धारा-144 लागू कर दी है। इसके तहत 15 नवंबर तक आतिशबाजी पर प्रतिबंध रहेगा। इस दौरान अगर कोई बच्चा पटाखे जलाता मिला तो इसके लिए उसके अभिभावक जिम्मेदार होंगे। डीसी ने बताया कि आदेशों की उल्लंघना करने वालों के खिलाफ विस्फोटक अधिनियम 1884 और 2008 के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ मैंने कार्रवाई के आदेश दे दिए हैं। इनमें क्रशर और कुछ फैक्टरियां भी शामिल हैं। गत दिनों ही यहां प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड की टीम जायजा लेने पहुंची थी। आतिशबाजी से भी प्रदूषण का स्तर बढ़ता है और प्रदूषण नियंत्रण और र्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से पटाखे बजाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
राजेश जोगपाल, डीसी, चरखी दादरी।