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Charkhi Dadri News: पार्षद के हस्ताक्षर बगैर वार्ड में अधूरे कार्यों के पूरे भुगतान का लगाया आरोप, विजिलेंस जांच की मांग उठाई

Fri, 13 Feb 2026 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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चेयरमैन से मिलने पहुंचे पार्षद व बैठक में मौजूद अधिकारी।  - फोटो : 1
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चरखी दादरी। शहर के विभिन्न वार्डों में हो रहे विकास कार्यों में अनियमितताएं बरतने व भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए पार्षदों ने एक बार फिर से चेयरमैन व अन्य अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को नगर परिषद के पांच पार्षद एकत्रित होकर चेयरमैन से मिलने पहुंचे। पार्षदों का आरोप है कि वार्ड में हुए काम पूरे किए बगैर ठेकेदार को पूरा भुगतान कर दिया गया, जबकि वार्ड में कई काम अधूरे पड़े है।
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पार्षदों ने आरोप लगाते हुए कहा कि वार्ड से संबंधित पार्षद के हस्ताक्षर बिना, किसी अन्य पार्षद के हस्ताक्षर से ठेकेदार को भुगतान किया गया है जिससे भ्रष्टाचार का अंदेशा है। उन्होंने कहा कि बार-बार मांगने के बावजूद नगर परिषद के अधिकारी फाइल नहीं दिखा रहे है, जिससे संदेह और भी बढ़ जाता है। इसके अलावा पार्षदों ने शहर में हो रहे गलियों के निर्माण कार्य में निम्न गुणवत्ता व हेरा-फेरी करने के भी आरोप लगाए। इसके बाद सभी पार्षद कार्यालय से बाहर आए और पत्रकारवार्ता कर नप कार्यशैली पर सवाल उठाए और मामले में विजिलेंस जांच की मांग की।



बैठक में हुआ हंगामा

नगर परिषद परिसर स्थित चेयरमैन कार्यालय में पार्षद मनोज वर्मा, जयसिंह लांबा, विनोद सिंहमार, नवीन प्रजापति व पार्षद प्रतिनिधि विरेंद्र चरखी पहुंचे। यहां चेयरमैन से बगैर हस्ताक्षर भुगतान करने की बात पर विचार विमर्श किया। बाद में चेयरमैन बक्शी सैनी ने नगर परिषद के एमई, जेई को बुलाया। इसी दौरान पार्षद व अधिकारियों के बीच खूब तू-तू, मैं-मैं हुई। वहीं, जेई सौहार्द ने कहा कि कागजों में संबंधित वार्ड के पार्षद के हस्ताक्षर होने आवश्यक नहीं है। फिलहाल कर्मचारी फील्ड में काम करने गए है, सोमवार को फाइल दिखाई दी जाएगी।
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कार्यों में खर्च होता है केवल तीसरा हिस्सा

वार्ड 20 से पार्षद प्रतिनिधि विरेंद्र चरखी ने कहा कि शहर में जो भी काम हुए है, उसमें निम्न स्तर की निर्माण सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। ज्यादातर गलियां-नालियां टूट चुकी है। किसी पार्षद को वार्ड में चल रहे कार्यों को पता नहीं चलता। ठेकेदार चेयरमैन के साथ मिलीभगत कर बिल पास करवा लेता है। जितनी राशि पास होती है, उसका केवल तीसरा हिस्सा ही उक्त काम में लगता है, दो हिस्से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाते हैं।



अधूरे कार्यों की पेमेंट की जा रही स्वीकृत

पार्षद विनोद सिंहमार ने कहा कि उनके वार्ड में करीब 40 लाख रुपये की लागत से 9 गलियों को निर्माण होना था, लेकिन अभी तक वहां नालियां नहीं बनीं। कई जगहों पर काम अधूरा है और टाइलें अभी से हिलने लगी हैं। जब ठेकेदार से बात की तो उसने काम पूरा होने और भुगतान होने की बात कही। उनकी जानकारी के बगैर पेमेंट पास करवा ली गई। चार दिन से फाइल दिखाने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन अधिकारी फाइल छुपा रहे हैं।



इस्तेमाल सामग्री का बिल से हो मिलान

पार्षद नवीन प्रजापति, जयसिंह लांबा, मनोज वर्मा ने कहा कि नगर परिषद की ओर से करवाए जा रहे निर्माण कार्यों में गबन की संभावना को देखते हुए मामले की विजिलेंस से जांच होनी चाहिए। निर्माण कार्य में लगी सामग्री का बिल के साथ मिलान होना चाहिए। नगर परिषद कहां-कहां काम करवा रही है, इसके बारे में खुद पार्षदों को ही जानकारी नहीं होती है।



वर्सन :

पार्षदों की ओर से लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। सरकार की ओर से बनाए गए नियमों के अनुसार जिस वार्ड में काम हो रहा हो, उसके दस्तावेज पर पार्षद के हस्ताक्षर होना जरूरी नहीं है। जो काम अधूरे हैं, उनको पूरा कराया जाएगा। पार्षद जो भी फाइल देखना चाहते हैं, वो कभी भी देख सकते हैं। - बक्शीराम सैनी, चेयरमैन, नगर परिषद, दादरी।
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