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Charkhi Dadri News: संसद के बाद दिल्ली एयरपोर्ट के विस्तार में भी प्रयोग हो रहा चरखी दादरी का रेत

Tue, 30 May 2023 12:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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चरखी दादरी का क्रशर जोन।
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चरखी दादरी। संसद के नए भवन निर्माण के अलावा दिल्ली एयरपोर्ट के विस्तार कार्य में भी चरखी दादरी के रेत प्रयोग हो रहा है। संसद भवन में प्रयोग हुए रेत में से 70 फीसदी अरावली की पहाड़ियों के बीच बसे चरखी दादरी जिले से गया है। खास बात ये है कि दादरी के रेत में 50 से 60 प्रतिशत सिलिका होती है जिससे भवन को मजबूती मिलती है।
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क्रशर संचालकों के अनुसार, चरखी दादरी क्रशर जोन में रेत वॉश करके तैयार किया जाता है और यह एम-सेंड जंगरोधी है। इससे भवन में लगाए गए लोहे पर जंग नहीं लगती और भवन की लाइफ भी काफी लंबी रहती है। क्रशर संचालकों के अनुसार नए भवन में लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक का रेत और रोड़ी चरखी दादरी जिले से ही गई है। इसके अलावा वर्तमान में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का विस्तार किया जा रहा है और इस कार्य में भी चरखी दादरी की रेत का प्रयोग हो रहा है। संवाद


- कोविड से पहले टीम ने लिए थे सैंपल
क्रशर संचालकों के अनुसार संसद भवन में चरखी दादरी का रेत प्रयोग करने से पहले एक टीम सैंपल लेने आई थी। टीम ने अलग-अलग क्रशर जोन से सैंपल लिए थे। सैंपल जांच में सिलिकॉन की मात्रा ज्यादा मिली, उन्हीं पहाड़ियों से सेंड (रेत) मंगवाई गई।
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ऐसी की जाती है सेंड वाॅशिंग
सबसे पहले बड़े-बड़े पत्थरों को तोड़कर छोटे-छोटे टुकड़े बनाए जाते हैं। उसके बाद उनको रोड़ी की आकृति में तोड़कर ग्राइंड किया जाता है। ग्राइंड करने के बाद सेंड को ऑटोमेटिक मशीन से वाॅश किया जाता है। वाॅश कर उसे सिल्ट रहित किया जाता है। यह सेंड सामान्य सेंड से 200 रुपये प्रति टन महंगी बिकती है।


ये है रेत की विशेषता
- इसमें 50-60 प्रतिशत सिलिकॉन की मात्रा होती है जो कि मजबूती प्रदान करती है।

- वाॅश होने के बाद यह जंगरोधी हो जाती है।

- इसमें सीमेंट की मात्रा सामान्य डस्ट से कम लगती है।

- लिपाई के अंदर फिनिशिंग एवं चमक अच्छी होती है।





- गुरुग्राम की 30 फीसदी इमारतों में भी प्रयोग हुआ है रेत
गुरुग्राम में तेजी से इमारतें बनी हैं। क्रशर संचालकों के अनुसार प्रतिदिन दादरी क्रशर जोन से काफी संख्या में भारी वाहन भवन निर्माण सामग्री लेकर गुरुग्राम जाते हैं। पिछले दस साल की बात करे तो गुरुग्राम में बनी इमारतों में से 20 फीसदी चरखी दादरी जिले से भेजी गई निर्माण सामग्री से बनी हैं।

- दूसरे जिलों व अन्य राज्यों में प्रतिदिन डेढ़ लाख टन माल होता है सप्लाई
जिले के अंदर 9 क्रशर जोन हैं। इन जोन में लगभग 343 क्रशर लगे हुए हैं। इन क्रशरों से प्रतिदिन पांच हजार गाड़ियां भवन निर्माण सामग्री लेकर निकलती हैं। एक गाड़ी में औसत 30 टन माल भरा जाता है। इस प्रकार पांच हजार गाड़ियों में प्रतिदिन डेढ़ लाख टन माल दूसरे जिलों और प्रदेशों में जाता है।

वर्जन:
नए संसद भवन की सेंड जिले की अरावली पहाड़ियों से गई है। इसके अलावा दिल्ली एयरपोर्ट के विस्तार कार्य में भी दादरी की सेंड प्रयोग हो रही है। इस सेंड में 50 से 60 प्रतिशत सिलिकॉन की मात्रा होती है जो भवन को मजबूती प्रदान करती है। वाॅश करके एम सेंड बनाई गई थी जो जंगरोधी होती है। जंगरोधी होने पर इमारत 500 साल से अधिक समय तक चल सकती है। लगभग 100 करोड़ रुपये की सेंड एवं रोड़ी यहां से गई है।
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-सोमबीर घसोला, जिला प्रधान, क्रशर एसोसिएशन, चरखी दादरी
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