चरखी दादरी/बाढड़ा। 77 वर्षीय पत्नी के साथ जहरीला पदार्थ निगल आत्महत्या करने वाले जगदीशचंद ने 20 साल तक सेना में सेवाएं दी। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने 1995 में बाढड़ा में खाद-बीज की दुकान की थी और उस दौरान यहां गिनी-चुनी दुकानें ही होती थी। उनका बाढड़ा से पुराना नाता रहा था। इसलिए यह घटना सामने आने के बाद हर कोई स्तब्ध रह गया। दिनभर बाढड़ा में इस मामले की चर्चा रही और कई व्यापारियों ने शोक स्वरूप अपनी दुकानें बंद रखी।
दरअसल, जगदीशचंद के परिवार की सामाजिक पैठ है। मूलरूप से गांव गोपी निवासी जगदीशचंद आर्य कन्या गुरुकल पचगांव के उप-प्रधान भी रहे। आर्य समाज बाढड़ा में भी वो कई पद दायित्व का निर्वहन कर चुके हैं। जगदीशचंद के बेटे एवं आर्य समाज उपाध्यक्ष विरेंद्र आर्य का खुद का कस्बे में खुद का व्यवसाय है जबकि उनके छोटे बेटे महेंद्र ने ट्रांसपोर्ट में खूब नाम कमाया। करीब 6 साल पहले हुई बेटे महेंद्र की मौत की घटना ने उनके जीवन को विचलित कर दिया।
इस घटना के बाद परिवार में बिखराव हुआ लेकिन उनके बड़े पोते के सेना में बड़े पद पर चयन होने व छोटे पोते के यूपीएससी में चयनित होने के बाद घर में खुशियां आईं, लेकिन उसके एक साल बाद फिर से यह हृदय विदारक घटना हो गई।
- प्रबुद्ध लोग बोले : घटना से क्षेत्र में शोक का माहौल
डॉ. देवेंद्र बोहरा, व्यापार मंडल अध्यक्ष संदीप सिटी, पूर्व सरपंच राकेश बाढ़डा, सत्यवीर, मांगेराम, जगत सिंह व कुलदीप आदि ने कहा कि इस घटना से क्षेत्र में शोक का माहौल है। लोगों को इस घटना पर यकीन नहीं हो रहा है।
- बेटा बोला : मानसिक रूप से परेशान थे माता-पिता
माता-पिता के आत्महत्या करने के बाद बेटे विरेंद्र आर्य ने कहा कि उनके दो भाइयों की मौत हो चुकी है। इसके चलते उनके माता-पिता काफी परेशान रहते थे। दो साल से वो परेशान थे और उन्होंने अपना जीवन खत्म कर लिया। हमने मेदांता, आर्यन समेत अन्य अस्पतालों में उपचार कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।