सरकार की योजना द्वारा बनाया गया शौचालय ।
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स्वच्छता अभ्यिान के व्यक्तिगत शौचालयों की दो साल बाद पेमेंट तो पहुंच गई, लेकिन चार माह से अब एडीसी का पद रिक्त होने की वजह से संबंधित व्यक्तियों को इस पेमेंट का भुगतान रुका हुआ है। इस मुहिम के तहत करीब 3000 शौचालयों का निर्माण करवाया गया था। इन लोगों को शौचालय निर्माण होने के बाद पेमेंट दिए जाने की बात कही गई थी। प्रति शौचालय 12 हजार रुपये की राशि निर्माण पर खर्च की गई।
स्वच्छता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार ने हर पहलू पर काम किया। इसके लिए हर स्तर पर काम शुरू किए, लेकिन खुले में शौच मुक्त बनाने की मुहिम को सिरे चढ़ाना सबसे मुश्किल बना हुआ है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच करने पर पूर्णतया रोक लगाना कठिन कार्य बना हुआ है। हालांकि इसके लिए गांवों में निगरानी कमेटी भी बना रखी हैं। समय- समय पर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों की भी मदद ली जा रही है। गांवों में कचरे के समायोजन पर भी फोकस किया जा रहा है, लेकिन गांवों की बाहरी सीमा में एकत्र कचरा परेशानी का कारण बन रहा है। इससे गांवों की आबोहवा भी खराब हो रही है। गांव व शहर में सार्वजनिक भागों में सफाई के लिए विशेष अभियान चलाए गए। स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, मंदिर परिसर, चौपाल, चौक व मेन गलियों में विशेष सफाई अभियान चलाए गए हैं।
12 हजार प्रति शौचालय खर्च किए
खुले में शौच मुक्त मुहिम के तहत जिले में 2016 के दौरान 7500 शौचालय बनाए गए थे। इनमें सार्वजनिक शौचालय भी शामिल हैं। इसके अलावा जिन जरूरतमंद लोगों को शौचालयों की जरूरत थी। वहां प्रति शौचालय 12 हजार रुपये का बजट खर्च किया गया। ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए कि जरूरत के अनुसार गंावों में घरों में शौचालय बनवाए जाए, ताकि लोगों का खुले में शौच करने का सिलसिला बंद हो सके और गांव को सुंदर व स्वच्छ बनाया जा सके। इसके लिए हर गांव में यह शौचालय बनाए गए।
आज तक नहीं हो सका पेमेंट का भुगतान
दो साल बीतने पर भी करीब 3000 व्यक्तिगत शौचालयों की पेमेंट नहीं हो सकी है। सरकार की ओर से अब पिछले दिनों इन शौचालयों की पेमेंट जारी कर दी गई है। जिले में पिछले करीब चार माह से एडीसी का पद रिक्त चला आ रहा है। अब सरकार की ओर से पेमेंट जारी होने के बाद भी इसका संबंधित लोगों को भुगतान नहीं हो पा रहा है। इसके लिए फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी तैयार हो चुकी है। अधिकतर शौचालयों को जीरो टैग से भी अटैच किया जा चुका है। इस संबंध में जिला उपायुक्त धर्मबीर सिंह का कहना है कि इस बारे में जल्द ही जानकारी लेकर वितरण प्रक्रिया शुरू करवाई जाएगी।