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जम्मू में हादसा: दादरी का जवान शहीद, सेना का ट्रक चला रहे थे अमित; पंचतत्व में हुए विलीन, बहन ने दी मुखाग्नि

Tue, 06 May 2025 02:32 PM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, दादरी (हरियाणा)

सार

भाई पवन कुमार ने बताया कि पठानकोट बटालियन से फोन पर परिजनों को सूचना मिली। अमित 5471, एएससी, बीएनएमटी रेजीमेंट में तैनात थे। उनके पिता की पहले ही मौत हो चुकी है।
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अमित कुमार - फोटो : संवाद
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विस्तार
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जम्मू में ट्रक पलटने से दम तोड़ने वाले सैन्य जवान अमित का पार्थिव शरीर मंगलवार को सुबह 11:07 पर पैतृक गांव सारंगपुर पहुंचा और दोपहर 12:06 बजे राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि की गई। जवान को उनकी बहन सीमा ने मुखाग्नि दी और पुलिस टुकड़ी ने सलामी देकर जवान को अंतिम विदाई दी।

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बता दें कि अमित की उम्र करीब साढ़े 23 साल थी। गांव के राजकीय स्कूल से उन्होंने 12वीं की पढ़ाई की। इसके बाद भिवानी के एक कॉलेज से बीकॉम की। अब डेढ़ साल पहले वो सेना में बतौर चालक भर्ती हुए और उनकी पोस्टिंग पठानकोट में थी। रविवार को वह सेना के किसी काम से ट्रक लेकर साथी जवानों के साथ जम्मू कश्मीर गए थे और उसी दौरान हादसे का शिकार हो गए।

उनके घर में दादा-दादी और मां है जबकि पिता राजेश सांगवान की करीब 5 साल पहले बीमारी के कारण मौत हो गई थी। दादा आजाद सिंह सेना से रिटायर्ड हैं और अब गांव में ही खेती करते हैं। मां कृष्णा सांगवान और दादी ओमपति गृहिणी हैं। अमित की बड़ी बहन सीमा की शादी हो चुकी है। जवान की मौत के बाद पूरे परिवार में मातम छाया हुआ है। ग्रामीणों व युवाओं ने शहीद अमर रहे के नारे लगाए।
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नवंबर में शादी का प्लान था
परिवार के मुताबिक अमित एक महीना पहले छुट्टी पर घर आए थे। तब परिवार के लोगों ने उनके लिए लड़की देखना शुरू की थी। आखिर में उनका रिश्ता भिवानी के दरियापुर गांव में एक लड़की से तय हुआ। इसके बाद अमित की सगाई करा दी। कुछ दिन पहले अमित ड्यूटी पर लौट गए थे। परिवार का प्लान था कि नवंबर में उनकी शादी करेंगे।

विधायक की पत्नी सुनीता सांगवान ने जवान को दिया राजकीय सम्मान
अंतिम विदाई पर विधायक सुनील सांगवान की पत्नी सुनीता सांगवान, भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील इंजीनियर, सांसद धर्मबीर सिंह मौके पर पहुंचे। इन्होंने पुष्पचक्र अर्पित किया और जवान को श्रद्धांजलि दी।
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मां बोली बेटे का नाम अमर रहे
जवान की मां कृष्णा ने अपने बेटे की अंतिम विदाई पर कहा कि उनके बेटे का अमर रहे तो इससे ज्यादा क्या चाहिए। अंतिम क्रिया के दौरान महिलाएं भी श्मशान घाट पहुंची और जवान की बहन व मां को सहारा दिया।

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