चरखी दादरी। हरियाणा में रोडवेज के निजीकरण और कर्मचारियों की अनदेखी के खिलाफ रोडवेज वर्कर्स यूनियन ने डिपो परिसर में दो घंटे रोष प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निजीकरण की राह नहीं छोड़ी, तो जल्द ही प्रदेश में निर्णायक आंदोलन छेड़ा जाएगा।
इस दौरान डिपो प्रधान सुनील फौजी, उपप्रधान सुखविंद्र बड़राई, सचिव योगेश जांगड़ा मिसरी, भूप धनासरी, राशीद कादमा, मनोज मलिक, जयकुमार आदि ने कर्मचारियों को संबोधित किया। यूनियन के राज्य प्रधान नरेंद्र दिनोद ने कहा कि गत 16 जून 2026 को परिवहन मंत्री के साथ हुई बैठक में रोडवेज के बेड़े में 500 नई बसें शामिल करने की घोषणा की गई थी और कर्मचारियों की कई प्रमुख मांगों पर सहमति बनी थी।
मंत्री ने 40 दिनों के भीतर दोबारा बैठक बुलाने का आश्वासन दिया था। मांगों को लागू करने के बजाय सरकार ने विभाग में सरकारी बसें बढ़ाना बंद कर प्राइवेट परमिट बांटने शुरू कर दिए हैं। यूनियन के महासचिव सुमेर सिवाच ने निजीकरण के मॉडल को जनविरोधी और घाटे का सौदा करार दिया। उन्होंने मांग की कि 62 रुपये 37 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से चलाई जा रही प्राइवेट इलेक्ट्रिक बसों व 362 रूटों पर दिए गए 3648 प्राइवेट परमिटों को रद्द किया जाए।
उन्होंने कहा कि रोडवेज विभाग में 10,000 नई सरकारी बसें शामिल की जाएं ताकि प्रदेश के दूर-दराज़ गांवों तक गरीब, किसान, मजदूर और छात्र-छात्राओं को सुलभ परिवहन सुविधा मिल सके। विभाग में साधारण बसों की खरीद से 60,000 बेरोजगारों को रोजगार दिया जा सकता है। एक इलेक्ट्रिक बस की कीमत में साधारण छह बसें खरीदी जा सकती हैं।
कर्मचारी नेता ने कहा कि सरकार अक्सर रोडवेज विभाग में घाटा होने की बात करती है जबकि सच्चाई यह है कि विभाग आम जनता, छात्रों और बुजुर्गों सहित 47 विभिन्न श्रेणियों को सब्सिडी व निशुल्क पास की सुविधा देती है। यदि सरकार इस छूट के बदले मिलने वाली राशि का भुगतान विभाग को समय पर करे तो रोडवेज विभाग कभी घाटे में नहीं रहेगा।
उन्होंने कहा कि रोडवेज कर्मचारियों के लिए स्वतंत्र वेतन आयोग गठित होना चाहिए। चालकों को 54 हजार 100 रुपये, परिचालकों व लिपिकों को 35,400 रुपये का वेतनमान दिया जाए। दादरी डिपो के 52 हेल्पर्स और 2016 के चालकों सहित सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए।